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स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की समीक्षा बैठक में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता लक्ष्यों में तेजी पर जोर

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स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की समीक्षा बैठक में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता लक्ष्यों में तेजी पर जोर


नई दिल्ली, 20 मई (हि.स.)। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए राज्यों में मजबूत राजनीतिक नेतृत्व, संस्थागत क्षमता और प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए अगले 10 महीनों में केंद्रित कार्ययोजना तैयार करनी होगी।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 19-20 मई को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक में मनोहर लाल ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय चुनौतियों, निविदा प्रक्रिया में देरी, भूमि आवंटन और संस्थागत क्षमताओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि “श्रृंखला की मजबूती उसकी सबसे कमजोर कड़ी पर निर्भर करती है।”

बैठक में बताया गया कि देश के 97 प्रतिशत वार्डों में घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू हो चुकी है। इसके साथ ही स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण को बढ़ावा देने के लिए दो डिब्बा, चार डिब्बा और छह डिब्बा प्रणाली अपनाई जा रही है। वर्ष 2014 में जहां केवल 16 प्रतिशत कचरे का प्रसंस्करण होता था, वहीं वर्ष 2026 में यह बढ़कर 81 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

मंत्रालय के अनुसार देशभर के 2,482 कचरा स्थलों पर मौजूद 26 करोड़ मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 65 प्रतिशत का निस्तारण किया जा चुका है, जिससे लगभग 9,000 एकड़ शहरी भूमि पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध हुई है।

मनोहर लाल ने कहा कि “स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता” को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि लोगों के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाया जा सके। उन्होंने राज्यों को स्वच्छतम पोर्टल पर प्रतिदिन प्रगति विवरण अद्यतन करने के निर्देश दिए, जिससे नियमित समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री एम. भट्टी विक्रमार्क, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव सहित 12 राज्यों के शहरी विकास मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इसके अलावा पर्यावरण, ग्रामीण विकास, सड़क परिवहन, पंचायती राज और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सहित 14 केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

सम्मेलन में वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण, कचरे से ऊर्जा उत्पादन, अपशिष्ट जल प्रबंधन, श्रमिक सुरक्षा, दृश्य स्वच्छता और विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में कार्यान्वयन जैसे विषयों पर 11 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। बैठक में एकीकृत नियंत्रण केंद्रों के माध्यम से निगरानी, क्षेत्रीय कचरा प्रबंधन मॉडल और बड़े शहरों में आधारभूत संरचना विस्तार पर भी चर्चा हुई।

मंत्रालय ने बताया कि एक अप्रैल 2026 से नए ठोस कचरा प्रबंधन नियम लागू हो चुके हैं, जिनके तहत दो श्रेणी पृथक्करण की जगह चार श्रेणी पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। इसमें गीला, सूखा, स्वच्छता संबंधी और घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग वर्गों में विभाजित करना शामिल है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर