जीटीए में प्रशासनिक गतिरोध खत्म करने की कवायद, आईएएस स्मृतिरंजन मोहंती बने प्रशासक
कोलकाता, 08 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद गोरखा टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के मुख्य कार्यकारी पद से अनीत थापा के इस्तीफे के बाद पहाड़ में बने प्रशासनिक गतिरोध को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने जीटीए में प्रशासक नियुक्त किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी स्मृतिरंजन मोहंती को जीटीए का प्रशासक बनाया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कलिम्पोंग में आयोजित सरकारी कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से शामिल होकर इसकी जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने पहाड़ी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और विकास कार्यों के लिए 250 करोड़ रुपये आवंटित करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में भूस्खलन से प्रभावित 73 परिवारों को तीन-तीन लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
दरअसल, खराब मौसम के कारण मुख्यमंत्री मंगलवार को कलिम्पोंग नहीं पहुंच सके। वह सिलिगुड़ी स्थित उत्तरकन्या लौट आए और वहीं से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने चाय श्रमिकों के लिए इस वर्ष 20 प्रतिशत पूजा बोनस देने की घोषणा की। उन्होंने बंद चाय बागानों को फिर से खोलने के लिए भी राज्य सरकार की ओर से कदम उठाने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कलिम्पोंग की वे महिलाएं, जो अन्नपूर्णा योजना के तहत तीन हजार रुपये की सहायता पाने की पात्र हैं, लेकिन अब तक उन्हें राशि नहीं मिली है, उन्हें जल्द योजना का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कलिम्पोंग की 15 हजार महिलाओं को पहले ही अन्नपूर्णा योजना की राशि मिल चुकी है। बाकी पात्र महिलाओं को भी इसका लाभ दिया जाएगा और कोई भी पात्र व्यक्ति योजना से वंचित नहीं रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कलिम्पोंग के लोगों के लिए आयुष्मान भारत कार्ड की व्यवस्था करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जिन्हें आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा, उन्हें मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ की स्थायी समस्याओं का समाधान राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल काम शुरू करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने जीटीए में कथित संस्थागत भ्रष्टाचार को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जीटीए में शिक्षक भर्ती और पेयजल व्यवस्था से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार हुआ तथा सरकारी धन की हेराफेरी की गई। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी और दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जीटीए में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके बाद अनीत थापा ने जीटीए के मुख्य कार्यकारी पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद पहाड़ी क्षेत्र में प्रशासनिक गतिरोध की स्थिति बनी हुई थी।------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

