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छात्र आत्महत्या रोकने के लिए सरकार उठा रही बहुस्तरीय कदम

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नई दिल्ली, 10 अगस्त (हि.स.)। सरकार ने कहा है कि देश में छात्र आत्महत्या के मामलों का आंकड़ा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा पुलिस में दर्ज मामलों के आधार पर एकत्र किया जाता है। एनसीआरबी की वार्षिक ‘भारत में आकस्मिक मृत्यु एवं आत्महत्या’ (एडीएसआई) रिपोर्ट में छात्र आत्महत्या के वर्षवार, राज्यवार, लिंग और आयु वर्गवार आंकड़े उपलब्ध हैं।

शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने सोमवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि आत्महत्या के विभिन्न कारणों में करियर एवं पेशेवर समस्याएं, अकेलेपन की भावना, दुर्व्यवहार, हिंसा, पारिवारिक समस्याएं, मानसिक विकार, शराब की लत, आर्थिक नुकसान और लंबे समय से चली आ रही पीड़ा शामिल हैं।

सरकार ने बताया कि छात्रों, शिक्षकों और परिवारों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए कई स्तरों पर उपाय किए जा रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय की ‘मनौदर्पण’ पहल के तहत प्रशिक्षित काउंसलरों के माध्यम से राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन, ‘सहयोग’ लाइव सत्र और ‘परिचर्चा’ वेबिनार आयोजित किए जा रहे हैं।

सीबीएसई से संबद्ध माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में काउंसलर एवं वेलनेस शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य है। जवाहर नवोदय विद्यालयों में दो काउंसलर नियुक्त करने का प्रावधान है और फरवरी 2026 तक 830 काउंसलर नियुक्त किए जा चुके हैं। केंद्रीय विद्यालयों में भी काउंसलर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, शैक्षणिक दबाव और रैगिंग से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और आईआईआईटी में मानसिक स्वास्थ्य एवं काउंसलिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत छह अगस्त तक 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 53 टेली-मानस सेल स्थापित किए गए हैं। हेल्पलाइन पर 43 लाख से अधिक कॉल संभाली जा चुकी हैं। सरकार ने टेली-मानस मोबाइल एप्लिकेशन और वीडियो परामर्श सुविधा भी शुरू की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार