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श्रीलंका में डूबे ईरानी जहाज का मलबा खोजने को भारत ने तैनात किये जहाज और एयरक्राफ्ट

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श्रीलंका में डूबे ईरानी जहाज का मलबा खोजने को भारत ने तैनात किये जहाज और एयरक्राफ्ट

 

- श्रीलंका ने एक अन्य ईरानी जहाज 'बुशहर' को त्रिंकोमाली हार्बर पर डॉक करने की मंजूरी दी

नई दिल्ली, 05 मार्च (हि.स.)। श्रीलंका के तट पर अमेरिका के टारपीडो हमले के बाद समुद्र में डूबे ईरानी जहाज के सर्च और रिकवरी ऑपरेशन में भारतीय नौसेना श्रीलंकाई टीम के साथ सहयोग कर रही है। भारत ने अपने दो जहाजों और दो समुद्री पेट्रोल एयरक्राफ्ट तैनात किये हैं। इस बीच एक अन्य ईरानी जहाज 'बुशहर' के श्रीलंका में मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जिसके अनुरोध पर श्रीलंका ने त्रिंकोमाली हार्बर पर डॉक करने की मंजूरी दे दी है। जहाज के त्रिंकोमाली जाने से पहले यात्रियों को निकालकर कोलंबो भेजा जाएगा।

भारतीय नौसेना की ओर से गुरुवार रात को एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि श्रीलंकाई नेवी की रिपोर्ट के मुताबिक 04 मार्च की सुबह कोलंबो के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमएमआरसी) में ईरानी जहाज आईआरआईएस डेना से एक डिस्ट्रेस कॉल आया। उस समय यह जहाज श्रीलंका की जिम्मेदारी वाले समुद्री इलाके में गाले से 20 नाटिकल मील पश्चिम में था। जानकारी मिलते ही भारतीय नौसेना ने तुरंत अपने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए। 04 मार्च को सुबह 10 बजे लंबी दूरी के एक समुद्री पेट्रोल एयरक्राफ्ट के साथ श्रीलंका की अगुवाई में चल रहे सर्च के काम को आगे बढ़ाया गया। एक और एयरक्राफ्ट को भी तुरंत तैनात करने के लिए स्टैंडबाय रखा गया था, जिससे हवा के रास्ते लाइफ राफ्ट गिराई जा सकती थी।

कैप्टन विवेक मधवाल ने बताया कि आस-पास काम कर रहे जहाज आईएनएस तरंगिनी को बचाव के काम में मदद के लिए तैनात किया गया और वह 04 मार्च को दोपहर 4 बजे सर्च एरिया में पहुंच गया। इस समय तक श्रीलंकाई नेवी और दूसरी एजेंसियों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया था। इसके बाद आईएनएस इक्षक को भी सर्च के काम को बढ़ाने के लिए कोच्चि से रवाना किया गया। भारत के दोनों जहाज समुद्र में डूबे ईरानी जहाज के मलबे में फंसे और लापता लोगों की तलाश के लिए चलाए जा रहे सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में श्रीलंकाई टीम का सहयोग कर रहे हैं।

नौसेना के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि श्रीलंका के समुद्र में डूबा ईरानी जहाज 'डेना' विशाखापत्तनम में अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और बहुराष्ट्रीय अभ्यास 'मिलन' में हिस्सा लेने के बाद अपने मुल्क लौट रहा था। यह भी नहीं बताया गया कि भारतीय जल क्षेत्र के इतने करीब किस तरह से एक अमेरिकी सबमरीन ने उसे टारगेट किया था। दूसरी तरफ, भारत की तरफ से पानी में पहला असली जवाब शाम 4 बजे आया, जब सब कुछ खत्म हो चुका था।

हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी हमले में बचाए गए ईरानी नाविक श्रीलंकाई बंदरगाह शहर गाले के एक अस्पताल में ठीक हो रहे हैं। अमेरिकी हमले के एक दिन बाद गाले में राष्ट्रीय अस्पताल में श्रीलंकाई नौसेना के बचाव दल ने 80 शवों को पहुंचाया है। इस अमेरिकी हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकर यातायात 90 फीसदी कम हो गया है। पोत गतिविधि के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि पिछले सप्ताह की तुलना में कुछ टैंकर अभी भी जलडमरूमध्य के माध्यम से पूर्व और पश्चिम की यात्रा कर रहे हैं।

श्रीलंका में विदेश मामलों के डिप्टी मिनिस्टर अरुण हेमचंद्र ने कहा कि ईरान के नेवी शिप डेना से अब तक करीब 80 लाशें बरामद की गई हैं। यह शिप यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री सबमरीन के हमले के बाद श्रीलंका के दक्षिणी तट पर डूब गया था। घटना के बारे में बात करते हुए डिप्टी मिनिस्टर ने कहा कि गाले के पास पानी में सर्च और रिकवरी ऑपरेशन जारी है, जहां हिंद महासागर में ईरानी वॉरशिप डूबा था। घटना के समय फ्रिगेट पर करीब 180 क्रू मेंबर सवार थे। अधिकारियों का कहना है कि 100 से ज़्यादा नाविकों के मारे जाने की आशंका है, जबकि कई अन्य अभी भी लापता हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम