परमाणु बिजली दरों को एक स्वतंत्र एवं पारदर्शी नियामक ढांचे के अंतर्गत लाए सरकार : पी. विल्सन
नई दिल्ली, 23 मार्च (हि.स.)। राज्य सभा में सोमवार को विशेष उल्लेख के दौरान सांसद पी विल्सन ने तमिलनाडु के लिए परमाणु ऊर्जा के न्यायसंगत आवंटन और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा हेतु परमाणु बिजली दरों को एक स्वतंत्र एवं पारदर्शी नियामक ढांचे के अंतर्गत लाने की मांग की। पी. विल्सन ने कहा कि
कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाइयों 3 एवं 4 (2,000 मेगावाट), जिनके 2026–27 के दौरान चालू होने की संभावना है, से उत्पादित बिजली के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा 5.9179 रुपये प्रति यूनिट (आधार) की संकेतात्मक दर गंभीर चिंता का विषय है। यह दर वर्तमान 3 से 4.10 रुपये प्रति यूनिट की दर से काफी अधिक है। नवीकरणीय ऊर्जा (भंडारण सहित) जैसे प्रतिस्पर्धी विकल्पों की प्रचलित दरों से भी ऊंची है।
तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने भी इस तरह की दर संरचना पर चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा की “मस्ट-रन” प्रकृति के कारण यह दीर्घकाल में तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ डाल सकती है, इसलिए उन्होंने पूंजी लागत, वित्तपोषण मान्यताओं, इक्विटी की पुनः समीक्षा करने की मांग की है।
इसके अतिरिक्त, 2025 के शांति अधिनियम के माध्यम से परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी को अनुमति दिए जाने से, पारदर्शी मूल्य निर्धारण तंत्र के अभाव में दरों में वृद्धि की आशंका और बढ़ जाती है। वर्तमान में परमाणु बिजली दरें प्रशासनिक रूप से निर्धारित होती हैं और इन पर केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग जैसे स्वतंत्र नियामक निकायों की निगरानी नहीं है।
पी. विल्सन ने मांग की कि इन इकाइयों की दरों की तुरंत समीक्षा और युक्तिकरण किया जाए और तमिलनाडु को न्यायसंगत आवंटन सुनिश्चित किया जाए, तथा उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा की दरों को एक स्वतंत्र और पारदर्शी नियामक ढांचे के अंतर्गत लाया जाए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

