आत्मनिर्भरता की दिशा में नौसेना को मजबूती, गार्डेनरीच में निर्मित ‘श्रुति’ जलावतरण
कोलकाता, 11 अगस्त (हि. स.)। भारतीय नौसेना की ताकत में मंगलवार को एक और इजाफा हुआ। गार्डेनरीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) में निर्मित पनडुब्बी रोधी नहीं, बल्कि समुद्री निगरानी और गश्ती कार्यों के लिए तैयार युद्धपोत ‘श्रुति’ का मंगलवार को औपचारिक रूप से जलावतरण किया गया। भारतीय नौसेना के एडमिरल संजय साधु ने इस पोत का जलावतरण किया। इस पोत के माध्यम से समुद्री क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाएंगे।
जीआरएसई ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी स्तर पर युद्धपोतों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में जीआरएसई भारतीय नौसेना के लिए 11 गश्ती पोतों का निर्माण कर रहा है।
‘श्रुति’ शब्द का अर्थ ‘जो सुना जाए’ है। भारतीय परंपरा में ‘श्रुति’ शब्द चार वेदों के लिए भी प्रयोग किया जाता है। वेद प्राचीन धार्मिक ग्रंथ हैं, जिन्हें लंबे समय तक मौखिक परंपरा के माध्यम से संरक्षित किया गया। भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा में ‘श्रुति’ का महत्वपूर्ण स्थान है। ‘श्रुति’ को मिलाकर अब तक चार गश्ती पोत भारतीय नौसेना को सौंपे जा चुके हैं। इससे पहले 26 मई को ‘संघमित्रा’ नामक एक अन्य गश्ती पोत का जलावतरण किया गया था।
जीआरएसई के अनुसार, इन गश्ती पोतों को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वे लंबे समय तक समुद्र में रहकर अपना दायित्व निभा सकें। इनमें आधुनिक निगरानी प्रणालियों को महत्व दिया गया है। समुद्री सुरक्षा अभियानों में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ये पोत तटीय क्षेत्रों के साथ-साथ समुद्र के बड़े हिस्से में नियमित गश्त करेंगे। समुद्री सीमा की सुरक्षा के अलावा संदिग्ध जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने में भी इनका उपयोग किया जाएगा। समुद्र में किसी जहाज के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में ये पोत राहत और बचाव कार्य के लिए भी पहुंच सकेंगे।
चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव अभियान में भी इन पोतों की मदद ली जा सकेगी। इस प्रकार समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ आपदा प्रबंधन और बचाव कार्यों में भी इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
‘श्रुति’ की लंबाई करीब 113 मीटर और चौड़ाई 14.6 मीटर है। इन पोतों का विस्थापन करीब तीन हजार टन है। इनकी अधिकतम गति 23 नॉट तक होगी।
आधुनिक निगरानी क्षमता, लंबे समय तक समुद्र में रहने की क्षमता और तेज गति के कारण ‘श्रुति’ भारतीय नौसेना के समुद्री निगरानी और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

