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नागपुर में उद्धव ठाकरे का ‘रामरक्षा आंदोलन’, भाजपा पर हमला

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नागपुर में उद्धव ठाकरे का ‘रामरक्षा आंदोलन’, भाजपा पर हमला


नागपुर, 18 जुलाई (हि.स.)। अयोध्या के राम मंदिर में चोरी की घटना के विरोध में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को नागपुर में ‘रामरक्षा पाठ आंदोलन’ किया। इस आंदोलन के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा और हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की।

इस अवसर पर उद्धव ठाकरे ने कहा, “हम जय श्रीराम और जय शिवराय का नारा लगाने वाले कट्टर हिंदू हैं। हमने हिंदुत्व नहीं छोड़ा है, लेकिन भाजपा का हिंदुत्व हमें स्वीकार नहीं है।” उन्होंने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व की भूमिका का उल्लेख करते हुए बाबरी मस्जिद मामले में उनके रुख को याद किया। उन्होंने कहा कि जब बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, तब बालासाहेब ठाकरे मजबूती से खड़े रहे थे। उन्होंने कहा था कि अगर यह काम मेरे शिवसैनिकों ने किया है तो मुझे उन पर गर्व है। उन्होंने ही “गर्व से कहो हम हिंदू हैं” का नारा बुलंद किया था।

राम मंदिर के मुद्दे पर भाजपा पर हमला करते हुए उद्धव ठाकरे ने सवाल किया, “क्या राम मंदिर का निर्माण राम मंदिर को लूटने के लिए किया गया है?” उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चुनौती देते हुए कहा कि मेरा मजाक उड़ाने के बजाय यह स्पष्ट करें कि आप लूट करने वालों के साथ हैं या राम की रक्षा करने वालों के साथ। बहरहाल इससे पहले राम रक्षा पठन करते हुए उद्धव ठाकरे को दिक्कत हुई थी। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने तंज कसते हुए पूछा था, “क्या इस बार पूरी रामरक्षा पढ़ेंगे?”

मुख्यमंत्री की आलोचना का जवाब देते हुए ठाकरे ने कहा कि यह आंदोलन यह देखने के लिए नहीं है कि रामरक्षा पाठ आता है या नहीं। आज राम भक्तों के सामने भगवान राम की रक्षा करने की स्थिति आ गई है और यह स्थिति भाजपा के शासन के कारण बनी है।

उन्होंने अयोध्या, केदारनाथ और उज्जैन में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया और सरकार से सवाल किए। ठाकरे ने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

नागपुर के इस आंदोलन में सांसद संजय राऊत, विधायक आदित्य ठाकरे सहित ठाकरे गुट के कई पदाधिकारी और शिवसैनिक शामिल हुए। रामरक्षा पाठ के माध्यम से राम मंदिर में हुई कथित चोरी की घटना की गहन जांच की मांग की गई।

दादर, ठाणे और अब नागपुर में हुए इन आंदोलनों के कारण राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुलकर्णी