हजरत शेख सलीम चिश्ती के उर्स में उमड़ी हर धर्म और समुदाय के अकीदतमंदों की भीड़
फतेहपुर सीकरी, 30 मार्च (हि.स.)। हजरत शेख सलीम चिश्ती के 456वें सालाना उर्स में सूफी संगीत की धूम रही। हजरत शेख सलीम चिश्ती फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित 'रंग-ए-सूफियाना' कार्यक्रम तथा 15 दिवसीय उर्स मुबारक का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, आध्यात्मिकता और भव्य व्यवस्थाओं के साथ संपन्न हो गया। इस मौके पर देश-विदेश से आए अकीदतमंदों ने मन्नत के धागे बांधे और सूफी परंपरा को आत्मसात किया। दरगाह का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, प्रेम और भाईचारे से सराबोर रहा।
यह 15 दिवसीय उर्स विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से भरपूर रहा, जिसमें उद्घाटन सत्र, सूफी विचार गोष्ठी, फातिहा, कव्वाली, चादरपोशी, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं भव्य ऑल इंडिया मुशायरा शामिल था। इसके अलावा मशहूर सूफी गायिका डॉ. नीता पांडे और सैयद साहिल आगा ने अमीर ख़ुसरो, कबीर और बाबा फरीदुदीन गंज शकर के कलाम पर आधारित सूफियाना दास्तानगोई प्रस्तुत कर दर्शकों से खूब सराहना प्राप्त की। इस अवसर पर इंग्लैंड के सूफी लेखक शाज़ ख़ान की पुस्तक डिवाइन लव का विमोचन भी किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में सांसद राजकुमार चाहर उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता दरगाह के सज्जादानशीन पीरज़ादा अरशद फरीदी चिश्ती ने की।
इस अवसर पर सांसद राजकुमार चाहर ने गंगा-जमुनी तहज़ीब को बढ़ावा देने पर ज़ोर देते हुए कहा कि हज़रत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह से हमेशा दुआओं और बरकतों का सिलसिला जारी रहा है और 'रंग-ए-सूफियाना' जैसे कार्यक्रम आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करते हैं।
पीरज़ादा अरशद फरीदी चिश्ती ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सूफी संतों का संदेश सार्वभौमिक है, जो प्रेम, सहिष्णुता और मानवता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह दरगाह सदियों से शांति, प्रेम और राष्ट्रीय एकता का केंद्र रही है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के आते हैं।
उन्होंने भविष्य में इस कार्यक्रम को और अधिक भव्य रूप से आयोजित करने का संकल्प भी व्यक्त किया।
उर्स के दौरान विभिन्न धर्मों और वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया, जो सूफी संतों के प्रेम, सहिष्णुता और भाईचारे के संदेश का जीवंत उदाहरण है।
हिन्दुस्थान समाचार/अब्दुल वाहिद
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हिन्दुस्थान समाचार / Abdul Wahid

