तकनीक के युग में नैतिकता पर जोर, शास्त्री के आदर्श आज भी प्रासंगिक: चंद्रचूड़
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जीवन नैतिक नेतृत्व की ऐसी मिसाल है, जो आज भी देश और दुनिया को प्रेरित करती है।
“प्रौद्योगिकी के युग में सार्वजनिक जीवन की नैतिकता” विषय पर आयोजित 32वें लाल बहादुर शास्त्री स्मृति व्याख्यान में चंद्रचूड़ ने कहा कि इतिहास कुछ व्यक्तियों को याद रखता है, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जिनके इर्द-गिर्द इतिहास स्वयं निर्मित होता है। उन्होंने शास्त्री को ऐसे ही व्यक्तित्वों में शामिल करते हुए उनके संघर्षपूर्ण बचपन का उल्लेख किया- जब वे गंगा पार कर रोज तैरकर स्कूल जाते थे, क्योंकि नाव का किराया देने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते थे।
चंद्रचूड़ ने कहा कि 1965 में युद्ध और भीषण खाद्यान्न संकट के समय शास्त्री ने देशवासियों से त्याग की अपील करने से पहले स्वयं अपने घर में उपवास रखकर उदाहरण प्रस्तुत किया। यह ‘शास्त्री व्रत’ केवल सरकारी निर्देश नहीं था, बल्कि देशभर में नैतिक जागरण और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन गया, जिसमें लाखों परिवारों ने सप्ताह में एक समय भोजन छोड़ने का संकल्प लिया।
उन्होंने “जय जवान, जय किसान” के नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि शास्त्री ने सैनिक और किसान दोनों को समान महत्व देकर देश की आत्मनिर्भरता और गरिमा को मजबूत किया।
1956 के अरियालुर रेल हादसे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रेल मंत्री के रूप में शास्त्री ने किसी कानूनी बाध्यता का इंतजार किए बिना नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। यह कदम सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और नैतिकता का अद्वितीय उदाहरण है।
व्याख्यान के दौरान चंद्रचूड़ ने कहा कि नैतिकता अक्सर संकट और विघटन के क्षणों में सबसे स्पष्ट रूप से सामने आती है और ऐसे समय में ही व्यक्ति और समाज की असली परीक्षा होती है।
तकनीक के युग पर उन्होंने कहा कि डिजिटल और डेटा आधारित तकनीकें, परमाणु तकनीक की तरह, शांति और विनाश दोनों का माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने आगाह किया कि इंटरनेट के जरिए युवाओं पर अश्लीलता और हिंसा का प्रभाव बढ़ रहा है और महिलाओं के खिलाफ जेंडर आधारित हिंसा को देखते हुए ऐसी सामग्री पर नियंत्रण के लिए कानून बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “अगर हम ईमानदारी केवल तब अपनाते हैं जब उसका लाभ हो, या कानून का पालन केवल तब करते हैं जब निगरानी हो, तो यह नैतिकता नहीं बल्कि लेन-देन है।” उन्होंने वैश्विक परिदृश्य का उदाहरण देते हुए कहा कि आज की दुनिया में टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय नीतियां भी इसी प्रकार की लेन-देन आधारित नैतिकता को दर्शाती हैं।
चंद्रचूड़ ने हाल के वैश्विक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया अब गहराई से परस्पर जुड़ी हुई है- जैसे कि खाड़ी क्षेत्र या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में होने वाली घटनाओं का असर भारत, इंडोनेशिया की ऊर्जा बाजारों से लेकर अमेरिका के चुनावों तक पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि हमें युवाओं, महिलाओं और देश के भविष्य की रक्षा करनी है तो इंटरनेट पर प्रदर्शित होने वाली सामग्री को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कानून बनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि शास्त्री का जीवन हमें यह सिखाता है कि सही कार्य करना चाहिए, भले ही उसकी कीमत चुकानी पड़े। उनका जीवन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक प्रकाशस्तंभ है और हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

