home page

नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर हंसता-खेलता बस्तर बनाना है : अमित शाह

 | 
नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर हंसता-खेलता बस्तर बनाना है : अमित शाह


नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बावजूद पांच दशकों तक चली हिंसा की पीड़ा को समाप्त करने के लिए प्रभावित लोगों के पुनर्वास और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की जरूरत है। सरकार का लक्ष्य न केवल नक्सलवाद को समाप्त करना है, बल्कि उसकी हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हंसता-खेलता क्षेत्र बनाना भी है।

शाह छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित दिव्यांग सेवा शिविर के दूसरे चरण को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी के तहत नक्सली हिंसा में दिव्यांग हुए आदिवासी भाई-बहनों को कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे फिर से आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।

गृह मंत्री ने बताया कि पांच से सात अक्टूबर के बीच जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें 1,570 से अधिक लाभार्थी बस्तर क्षेत्र के थे। ये आंकड़े बताते हैं कि पांच दशकों तक चले नक्सलवाद ने गरीब आदिवासी समुदाय को किस हद तक प्रभावित किया। निर्दोष नागरिकों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए बारूदी सुरंगों और विस्फोटकों के जरिए अपंग बना देना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

शाह ने कहा कि शिविर में जरूरतमंदों को कृत्रिम हाथ-पैर, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और कैलिपर्स जैसे सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने एक लाभार्थी के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि तीन साल बाद अपने हाथ से गिलास उठाकर पानी पी पाने की उसकी खुशी को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, भारतीय जैन संघ और अभियान से जुड़ी अन्य संस्थाओं के योगदान की सराहना की।

गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा से इस अभियान को लगातार जारी रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जहां भी राज्य सरकार को संसाधनों की कमी होगी, वहां केंद्र सरकार पूरी सहायता के लिए खड़ी रहेगी। प्रत्येक दिव्यांग और नक्सल हिंसा से प्रभावित व्यक्ति का पुनर्वास कर उसे समाज में सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देना सरकार का दायित्व है।

शाह ने कहा कि नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकलकर बस्तर में विकास और सामान्य जनजीवन को बहाल करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने अपने संबोधन में दावा किया कि 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि इनमें से जिन 7,500 लोगों के पास बैंक खाते नहीं थे, उनके खाते खोले गए हैं। इसके अलावा 1,625 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई है, जबकि 455 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने कहा कि 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है और 404 लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिए गए हैं। दो हजार से अधिक आदिवासियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 6,700 नए राशन कार्ड बनाए गए हैं और 2,800 परिवारों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए 372 नई परियोजनाएं शुरू की गई हैं और 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही 48,526 लोगों को आधार कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर में सुरक्षा शिविरों की भूमिका को अब विकास और जनसेवा से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को शहीद भीमा मंडावी सेवा केंद्रों में बदलने की योजना है। इन केंद्रों के माध्यम से सरकारी अधिकारी स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, राशन और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर पहले सुरक्षा बल तैनात रहते थे, वहीं अब विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और आदिवासी परिवारों की समस्याओं के समाधान के प्रयास किए जाएंगे।

शाह ने कहा कि बस्तर को भय और हिंसा से बाहर निकालकर उसकी सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक जीवन को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे युवाओं को खेलों में भागीदारी, जनजातीय कला-संस्कृति के संरक्षण और दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि जहां कभी गोलियों और बमों की आवाज सुनाई देती थी, वहां आज बड़ी संख्या में युवा खेलों में भाग ले रहे हैं और अपनी परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने और बस्तर में विकास की गति तेज करने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी ढांचे और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण से बस्तर में स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।

------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार