वैज्ञानिक शोध को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए सारल एआई का इस्तेमाल करेगा सीएसआईआर-निस्पर
नई दिल्ली, 15 सितंबर (हि.स.)। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-निस्पर) ने वैज्ञानिक शोध को आम लोगों तक सरल तरीके से पहुंचाने के लिए सारल एआई का उपयोग शुरू किया है। इसके तहत संस्थान अपनी शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध को वीडियो के रूप में प्रस्तुत करेगा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, यह पहल उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विज्ञान संचार को मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। सारल एआई, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) की पहल है, जिसकी मदद से शोध पत्रों को आकर्षक और आसानी से समझ आने वाले वीडियो में बदला जा सकता है।
सीएसआईआर-निस्पर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम के नेतृत्व में संस्थान विज्ञान संचार के लिए नई तकनीकों और डिजिटल मंचों का उपयोग बढ़ा रहा है। इसी क्रम में हाल ही में सारल एआई पर एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें 90 से अधिक प्रतिभागियों, शोधकर्ताओं और संपादकों ने हिस्सा लिया।
डॉ. गीता वाणी रायसम ने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान का महत्व तब और बढ़ जाता है जब वह शोध समुदाय से बाहर भी लोगों तक पहुंचे। सारल एआई जैसी तकनीकों के जरिए भारतीय शोध को अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
मंत्रालय ने बताया कि एएनआरएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने भी संस्थान को जटिल वैज्ञानिक शोध को सरल रूप में आम जनता तक पहुंचाने के लिए सारल एआई का उपयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से छात्रों और आम लोगों के लिए वैज्ञानिक शोध को समझना, खोजना और साझा करना आसान बनाना है। तैयार किए गए वीडियो यूट्यूब प्लेलिस्ट के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे शोध पत्रों के अलावा डिजिटल माध्यम से भी वैज्ञानिक जानकारी लोगों तक पहुंच सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

