पूर्वोत्तर अब लैंडलॉक इलाका नहीं रहाः सर्बानंद सोनोवाल
शिलांग, 15 जून (हि.स.)। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में पूर्वोत्तर भारत का कायाकल्प हुआ है। यह क्षेत्र पहले बुनियादी ढांचे की कमी और सीमित निवेश के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह आर्थिक विकास का एक प्रमुख केंद्र बन गया है, जो भारत की सबसे महत्वपूर्ण विकास उपलब्धियों में से एक है।
उन्होंने आगे कहा, पूर्वोत्तर अब लैंडलॉक (चारों ओर ज़मीन से घिरा) इलाका नहीं रहा। यह तेज़ी से दक्षिण एशिया को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाले लॉजिस्टिक्स, व्यापार और कनेक्टिविटी कॉरिडोर के तौर पर विकसित हो रहा है। मंत्री ने त्रिपुरा के 'क्वीन पाइनएप्पल' और असम की लीची जैसे उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में निर्यात का भी ज़िक्र किया। ये इस बात के उदाहरण हैं कि कैसे बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उत्पादकों की मदद कर रहा है और बाज़ार तक उनकी पहुंच बढ़ा रहा है।
शिलांग में 'नॉर्थ-ईस्ट इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर समिट एंड एग्जीबिशन 2026' को संबोधित करते हुए सोनोवाल ने सोमवार को कहा कि यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए विकास का एक रणनीतिक इंजन बनकर उभरा है। इसे कनेक्टिविटी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और औद्योगिक विकास में अभूतपूर्व निवेश का समर्थन मिला है।
इस बदलाव को सीमावर्ती क्षेत्र से आर्थिक विकास के केंद्र की ओर बदलाव बताते हुए सोनोवाल ने कहा कि पूर्वोत्तर अब राष्ट्रीय नीति-निर्माण के हाशिए से हटकर भारत के विकास एजेंडे के केंद्र में आ गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिस क्षेत्र को कभी मुख्य रूप से भौगोलिक दूरी और बुनियादी ढांचे की बाधाओं के नजरिए से देखा जाता था, उसे अब दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत के प्रवेश द्वार और देश की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में पहचाना जा रहा है।
2014 से इस क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश पर प्रकाश डालते हुए सोनोवाल ने कहा कि 'ग्रॉस बजेटरी सपोर्ट' (कुल बजटीय सहायता) ढांचे के तहत पूर्वोत्तर के लिए आवंटन 2014 में लगभग ₹20,000 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹1.08 लाख करोड़ से अधिक हो गया है, जबकि पिछले दशक में इस क्षेत्र में कुल खर्च ₹7.3 लाख करोड़ से अधिक रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) का बजट तीन गुना से अधिक बढ़ गया है - 2014 में ₹2,000 करोड़ से बढ़कर मौजूदा बजट चक्र में ₹6,812 करोड़ हो गया है। सोनोवाल ने कहा, ये निवेश सिर्फ़ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बना रहे हैं; ये किसानों को बाज़ार से, उद्यमियों को पूंजी से, छात्रों को शिक्षा से और पूरे क्षेत्र को राष्ट्रीय और वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़कर नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
मंत्री ने पूर्वोत्तर में ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर ज़ोर देते हुए बताया कि 2014 से अब तक ₹1.07 लाख करोड़ से ज़्यादा के निवेश से लगभग 10,000 किलोमीटर नेशनल हाईवे बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 46,000 किलोमीटर से ज़्यादा ग्रामीण सड़कों ने पहले अलग-थलग पड़े समुदायों के लिए पहुंच और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया है।
रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में सोनोवाल ने कहा कि 2014 से पहले की तुलना में पूर्वोत्तर में निवेश लगभग पांच गुना बढ़ गया है और अभी लगभग ₹77,000 करोड़ की लागत वाली परियोजनाएं चल रही हैं। उन्होंने बोगीबील ब्रिज, मिज़ोरम के लिए पैसेंजर रेल कनेक्टिविटी और धुबड़ी-फूलबाड़ी ब्रिज प्रोजेक्ट जैसी परियोजनाओं का ज़िक्र किया, जो क्षेत्रीय एकीकरण और बाज़ार तक पहुंच को मज़बूत कर रही हैं।
मंत्री ने हवाई कनेक्टिविटी में सुधार पर भी ज़ोर दिया और बताया कि पूर्वोत्तर में चालू एयरपोर्ट्स की संख्या 2014 में नौ से बढ़कर सोलह हो गई है, जबकि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम आज़ादी के बाद पहली बार नियमित कमर्शियल हवाई सेवाओं से जुड़े हैं। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को इस दशक की अहम उपलब्धियों में से एक बताते हुए सोनोवाल ने कहा कि पूर्वोत्तर के लगभग 96 प्रतिशत गांवों में अब मोबाइल नेटवर्क की सुविधा है और 40,000 से ज़्यादा गांवों में 4जी सेवाएं उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा, डिजिटल कनेक्टिविटी अब आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर बन गई है। यह उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ा रही है और पूर्वोत्तर को नॉलेज इकॉनमी से जोड़ रही है।
मेघालय के विकास का ज़िक्र करते हुए सोनोवाल ने कहा कि यह राज्य इस बात का उदाहरण बन गया है कि कैसे बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन, गवर्नेंस में सुधार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आर्थिक विकास को तेज़ कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेघालय ने पर्यटन, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, कृषि और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए अपनी प्राकृतिक खूबियों, उद्यमिता इकोसिस्टम और रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाया है।
उन्होंने 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' और गवर्नेंस में सुधार के मामले में मेघालय के प्रदर्शन की तारीफ़ की और बताया कि राज्य ने सभी 23 प्राथमिकता वाले सुधार क्षेत्रों को पूरा करने के बाद 'अनुपालन में कमी और डीरेगुलेशन 1.0' में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया है। उन्होंने कहा कि चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल और ट्रांसपोर्ट व डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जैसी पहलों ने नॉर्थ-ईस्ट की आर्थिक वृद्धि में योगदान देने वाले क्षेत्र के तौर पर मेघालय की स्थिति को मजबूत किया है।
मंत्री ने इस क्षेत्र में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के उभरने का भी ज़िक्र किया। उन्होंने असम के जागीरोड में ₹27,000 करोड़ की टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट फैसिलिटी और असम में पहली 'मेड-इन-इंडिया' सेमीकंडक्टर चिप के प्रोडक्शन को औद्योगिक बदलाव के संकेत बताया। सोनोवाल ने कहा, जो इलाका कभी कनेक्टिविटी की कमी के लिए जाना जाता था, वह अब दुनिया के सबसे एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में से एक में हिस्सा ले रहा है। यह एक नए नॉर्थ-ईस्ट के उभरने को दिखाता है।
पोर्ट्स, शिपिंग और वॉटरवेज़ के केंद्रीय मंत्री के तौर पर, सोनोवाल ने क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ाने में इनलैंड वॉटरवेज़ (आंतरिक जलमार्गों) की बढ़ती भूमिका पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र और बराक नदी प्रणालियों को रणनीतिक लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के तौर पर विकसित किया जा रहा है, जो इंडो-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट के ज़रिए नॉर्थ-ईस्ट को मुख्य भारत और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ते हैं।
सोनोवाल के मुताबिक, असम में इनलैंड वॉटरवेज़ इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹750 करोड़ से ज़्यादा के प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, जबकि ₹1,170 करोड़ से ज़्यादा के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। जोगीघोपा इनलैंड वॉटरवेज़ टर्मिनल और बोगीबील इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट टर्मिनल जैसी सुविधाओं से मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स मजबूत होने और बांग्लादेश, भूटान व दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
अपनी बात को समाप्त करते हुए सोनोवाल ने कहा कि पूर्वोत्तर में लगभग 129 गीगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता, बढ़ता टूरिज़्म सेक्टर और रणनीतिक लोकेशन भविष्य की वृद्धि के लिए बड़े मौके देते हैं।
उन्होंने समिट के दौरान सीईओ राउंडटेबल की अध्यक्षता भी की और सीमेंट, लॉजिस्टिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, स्टील, हॉस्पिटैलिटी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर के प्रमुख बिज़नेस प्रतिनिधियों से बातचीत की। इस बातचीत में नॉर्थ-ईस्ट में निवेश के मौकों और आर्थिक विस्तार पर चर्चा की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

