समरस राष्ट्र बनाने के लिए राष्ट्रीय आंदोलन है आरएसएस: नरेन्द्र ठाकुर
- मीडिया संवाद कार्यक्रम काे अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर ने किया संबाेधित
- शताब्दी वर्ष पर संघ ने आमजन से जुड़े पांच अहम बिन्दुओं पर काम करने का लिया निर्णय
कानपुर, 03 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि
देश की आजादी से पूर्व से ही आरएसएस सक्रिय है। संघ का मानना है कि आजादी तो मिल गई लेकिन अभी भी बहुत से कार्य बाकी हैं। इसीलिए आरएसएस संगठन के साथ राष्ट्र को समरस बनाने के लिए अपने को राष्ट्रीय आंदोलन के रुप में कार्य करता है। संघ का उद्देश्य सशक्त, संगठित व समरस राष्ट्र बनाना है। इसके लिए सभी का सहयोग व समर्थन चाहिए है, तभी सफलता मिलेगी।
अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर शुक्रवार को कानपुर में संघ के शताब्दी वर्ष पर आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम काे संबाेधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कानपुर प्रान्त की ओर से बेनाझाबर स्थिति एक निजी होटल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष में विविध प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। यह क्रम विजयादशमी 2025 से प्रारंभ हुआ था। इसके बाद पथसंचलन, व्यापक गृह संपर्क व हिन्दू सम्मेलन पूरे देश में हुए। आप सभी पत्रकारों में से कुछ समाचार लिखने वाले और कुछ इन विषयों पर सामग्री निर्माण करने वाले होंगे। इसलिए आपको संघ के बारे में जानकारी होना आवश्यक है।
इस यात्रा में आए अनेक चरण
उन्होंने कहा कि संघ की 100 वर्ष की यात्रा में अनेक चरण आये। वर्ष 1925 में जब भारत अपनी स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहा था, उस समय डॉ. हेडगेवार के मन में यह विचार आया कि हम स्वतंत्र तो हो जायेंगे, लेकिन यह स्वतंत्रता टिकी कैसे रहे, इसके लिए कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने विचार किया कि हम पिछले लगभग एक हजार वर्ष से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हम गुलाम ही क्यों हुए। तो उनको ध्यान में आया कि हमें अपने देश को संगठित और देशभक्त बनाने की आवश्यकता है। वो इस विचार को लेकर गांधीजी, सुभाष चन्द्र बोस और लोकमान्य तिलक जैसे उस समय के सभी महापुरुषों से मिले। उन्हाेंने कहा कि अधिकांश की प्राथमिकता थी कि पहले देश स्वतंत्र हो जाए, फिर इस पर भी विचार कर लेंगे। किन्तु डॉ. हेडगेवार का मानना था कि ये दोनों कार्य साथ-साथ चल सकते हैं। इसके बाद 1925 में डॉ. हेडगेवार ने संगठन बनाया, तब संघ का नामकरण भी नहीं हुआ था। यह नाम बाद में पड़ा। संघ को नाम या प्रसिद्धि की कामना नहीं है। हम सिर्फ दैनिक शाखा के माध्यम से समाज के प्रति संवेदनशील व व्यक्तिगत चरित्र निर्माण का कार्य करते हैं।
संघ चुपचाप कार्य करने में रखता है विश्वास
सह प्रचार प्रमुख ने कहा कि देश में जब विभाजन की मांग शुरु हुई, तब संघ के प्रति आकर्षण भी बढ़ा। संघ का विरोध भी शुरु हुआ। हमारा कोई विरोधी नहीं है। वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। वह स्वाभाविक नहीं है। संघ पर आपातकाल में भी प्रतिबन्ध लगा था, लेकिन हम चुपचाप कार्य करने में विश्वास रखते हैं। आज संघ का काम समाज के सहयोग से बढ़ा है। पूरे देश में लगभग 55,700 स्थानों पर 89 हजार शाखाएं तथा लगभग 23 हजार स्थानों पर 32,600 से अधिक मिलन चल रहे हैं। संघ समाज में समस्या आने पर उसके समाधान की दृष्टि प्रदान करने का कार्य करता है। इस कार्य में 32 अखिल भारतीय संगठन हमारा सहयोग कर रहे हैं। प्रांतों में स्थानीय स्तर पर भी अनेक संगठन हैं। देशभर में 1.70 लाख नियमित सेवा कार्य चल रहे हैं।
पांच बिन्दुओं पर कार्य करने का हुआ निर्णय
उन्होंने कहा कि संघ ने शताब्दी वर्ष में वर्तमान समय से जुड़े पांच बिन्दुओं पर कार्य करने का निर्णय लिया है। सामाजिक समरसता अर्थात मंदिर, श्मशान और पानी सबके लिए होना चाहिए। कुटुंब प्रबोधन अर्थात परिवारों को भारतीय मूल्यों और संस्कारों के आधार पर विकसित करना। पर्यावरण अर्थात पेड़, पानी और प्लास्टिक के सम्बन्ध में कार्य करना। स्व-आधारित जीवन शैली और स्वदेशी को अपनाने पर बल देना। अपनी वेशभूषा व अपने खानपान को प्राथमिकता देना।
पत्रकारों के सवालों पर दिए जवाब
कार्यक्रम में सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर ने पत्रकारों के विभिन्न प्रश्नों का उत्तर भी दिये। यूजीसी के एक विवादित नियम पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि संघ हर विषय पर प्रतिक्रिया नहीं देता है। यह मामला अभी कोर्ट में है, इसलिए हमने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हमारा मानना है कि किसी नियम या कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। समाज के लिए भी आवश्यक है कि एकजुटता बनी रहे।
कए प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 में प्रचार विभाग बना। लगभग 2005-06 से हमने मीडिया संवाद बढ़ाना शुरु किया है और हम निरंतर यह कार्य बढ़ा रहे हैं। युवाओं से संघ का जुड़ाव कम होने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि ज्वाइन आरएसएस के माध्यम से प्रतिवर्ष 8-10 हजार युवा हमारे साथ जुड़ रहे हैं। हमारे यहाँ प्राथमिक वर्ग युवा स्वयंसेवकों को एक बार ही करना होता है। इसमें 1.24 लाख से अधिक स्वयंसेवक भाग लेते हैं।
महिलाओं की भागीदारी व उनसे जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि हम किसी विषय पर प्रतिक्रिया से अधिक कार्य करने पर विश्वास रखते हैं। हमारे अन्य सहयोगी संगठनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़े, इसके लिए कार्य हो रहा है। मुस्लिमों को संघ से जोड़ने के प्रश्न पर नरेन्द्र ने कहा कि संघ हिन्दुओं का संगठन है और हमारे लिए सभी भारतवासी हिन्दू हैं। इसलिए कोई भी संघ में आ सकता है। हम किसी वर्ग विशेष को संघ से जोड़ने के लिए कभी कोई अभियान नहीं चलाते हैं।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी, प्रान्त संघचालक भवानी भीख, प्रान्त प्रचारक श्रीराम, प्रान्त प्रचार प्रमुख डॉ. अनुपम, प्रान्त सह प्रचार प्रमुख संजीव सोमवंशीव डॉ. रतन, विश्व संवाद केंद्र प्रमुख सारांश कनौजिया, प्रान्त मीडिया संवाद प्रमुख क्रांति कटियार, विभाग प्रचारक बैरिस्टर, विभाग प्रचार प्रमुख आशीष एवं विभिन्न मीडिया संस्थानों के संवाददाता व छायाकार आदि मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अजय सिंह

