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संघ की समन्वय बैठक में जनसांख्यिकीय बदलाव और नशा मुक्ति पर होगा मंथन

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संघ की समन्वय बैठक में जनसांख्यिकीय बदलाव और नशा मुक्ति पर होगा मंथन


- ‘जॉइन आरएसएस’ के जरिए जुड़ने वालों की संख्या ढाई गुना बढ़ी, 65 प्रतिशत आवेदक 30 वर्ष से कम आयु के

विशाखापत्तनम, 18 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय समन्वय बैठक में देश में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव, सामाजिक परिवर्तन, नशा मुक्ति और समग्र भारतीय विकास मॉडल सहित विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा होगी। यह बैठक 19 से 21 अगस्त तक विशाखापत्तनम के समीप गुडीलोवा स्थित विज्ञान विहार विद्यालय में आयोजित की गयी है।

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने मंगलवार को यहां बैठक से पहले आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि बैठक 19 अगस्त को सुबह नौ बजे शुरू होगी और 21 अगस्त की शाम तक चलेगी। इसमें संघ की प्रेरणा से कार्य कर रहे 32 संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी हिस्सा लेंगे।

उन्होंने बताया कि बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह सरकार्यवाह और अन्य केंद्रीय पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिन्दू परिषद, भारतीय जनता पार्टी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, राष्ट्र सेविका समिति सहित विभिन्न संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री, अखिल भारतीय संगठन मंत्री और चयनित कार्यकर्ता बैठक में शामिल होंगे।

आंबेकर ने बताया कि विभिन्न संगठनों के 49 महिला प्रतिनिधियों सहित कुल 253 प्रमुख कार्यकर्ता तथा संघ के पदाधिकारियों को मिलाकर 327 प्रतिनिधियों के बैठक में भाग लेने की उम्मीद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई कार्यकारी या निर्णय लेने वाली बैठक नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य विभिन्न संगठनों के बीच अनुभव साझा करना और आपसी समन्वय को बेहतर बनाना है।

बैठक में देश की वर्तमान स्थिति, सामाजिक परिवर्तन और विभिन्न सामाजिक समस्याओं पर विचार-विमर्श होगा। जनसंख्या असंतुलन और जनसांख्यिकीय बदलाव से उत्पन्न चिंताओं तथा उनके समाधान के उपायों पर भी चर्चा की जाएगी। युवाओं को नशे से दूर रखने के उपायों और नशामुक्ति के लिए विभिन्न संगठनों की भावी भूमिका पर भी विचार किया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं में जागरूकता बढ़ाने से जुड़े अन्य विषयों पर भी चर्चा होगी।

संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर निर्धारित पंच परिवर्तन के विषयों पर भी बैठक में चर्चा होगी। इनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, ‘स्व’ का भाव तथा नागरिक कर्तव्यों का पालन शामिल हैं। इन विषयों पर स्वयंसेवकों और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा के साथ शताब्दी वर्ष के बाद इन्हें आगे बढ़ाने की रणनीति और विभिन्न संगठनों की भूमिका पर भी विचार होगा।

आंबेकर ने कहा कि विकास को केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसके विभिन्न आयाम हैं और संतुलित विकास आवश्यक है। बैठक में आर्थिक पहलुओं के साथ समाज के अन्य क्षेत्रों को संतुलित करने वाले समग्र ‘भारतीय विकास मॉडल’ की अवधारणा पर भी चर्चा होगी और आने वाले समय में विभिन्न संगठन अपनी योजनाएं तैयार करेंगे।

उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान संगठन के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है। संघ की वेबसाइट पर ‘जॉइन आरएसएस’ के माध्यम से जनवरी से जुलाई 2025 के बीच 55,423 लोगों ने पंजीकरण कराया था, जबकि 2026 की इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 1,23,287 हो गई। जुलाई 2025 में 9,718 लोगों ने संघ से जुड़ने की इच्छा जताई थी, जबकि जुलाई 2026 में यह संख्या बढ़कर 24,086 हो गई। आवेदन करने वालों में करीब 65 प्रतिशत की आयु 30 वर्ष से कम और करीब 85 प्रतिशत की आयु 40 वर्ष से कम है।

पत्रकार वार्ता में दक्षिण मध्य क्षेत्र के सह संघचालक दूसी रामकृष्ण और अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी भी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार