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एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से मिला धार्मिक नेताओं का प्रतिनिधिमंडल

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एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से मिला धार्मिक नेताओं का प्रतिनिधिमंडल


नई दिल्ली, 06 अगस्त (हि.स.)।

अल्पसंख्यकों के संयुक्त कार्य मंच के अध्यक्ष और सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में भारत के विभिन्न ईसाई समुदायों और धार्मिक संस्थाओं के प्रमुख प्रतिनिधियों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। बैठक में प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित विधेयक को वर्तमान स्वरूप में वापस लेने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि विधेयक में संशोधन के साथ आगे बढ़ने की प्रक्रिया जारी रहती है तो इसे व्यापक चर्चा, सभी संबंधित पक्षों से परामर्श और कानूनी पहलुओं की समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेजा जाना चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 की धारा 15 को लेकर चिंता जताई और इसे हटाने की मांग की। प्रतिनिधियों का कहना था कि विदेशी अंशदान से संचालित धर्मार्थ संस्थाओं या उनकी संपत्तियों को सरकार के अधीन करने का कोई भी प्रावधान नहीं होना चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली डायोसिस के आर्चबिशप अनिल कूटो, चर्च ऑफ साउथ इंडिया के मॉडरेटर डॉ. के. रूबेन मार्क, करुण्या विश्वविद्यालय के चांसलर और जीसस कॉल्स के संस्थापक डॉ. पॉल दिनाकरन, नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया के महासचिव रेव. डॉ. असीर एबेनेजर, चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के प्रतिनिधि, बैपटिस्ट चर्च के पदाधिकारी तथा अन्य प्रमुख धार्मिक नेता शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री को बताया कि प्रस्तावित संशोधनों में विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के पंजीकरण समाप्त होने, धर्मार्थ संपत्तियों के सरकार में निहित होने, संस्थाओं के प्रबंधन में सरकारी भूमिका और संपत्तियों के स्थायी हस्तांतरण जैसे प्रावधान शामिल हैं। प्रतिनिधियों के अनुसार, इन प्रावधानों का प्रभाव देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अनाथालय, वृद्धाश्रम, अस्पतालों और कमजोर वर्गों की सेवा करने वाली अन्य धर्मार्थ संस्थाओं पर पड़ सकता है।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि विदेशी अंशदान के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनियमितताओं की रोकथाम आवश्यक है, लेकिन इसके लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रावधान नहीं होने चाहिए जो संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों और धर्मार्थ संस्थाओं की स्वतंत्र कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।

बैठक के बाद सांसद पी विल्सन ने बताया कि मुलाकात के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना। करीब एक घंटे से अधिक समय तक चली चर्चा में प्रस्तावित विधेयक के साथ-साथ वर्तमान एफसीआरए कानून के विभिन्न प्रावधानों पर भी विचार-विमर्श हुआ। विशेष रूप से उन धाराओं पर चर्चा हुई जिनमें संस्थाओं की संपत्तियों के निहित होने और उनके प्रबंधन से जुड़े विषय शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों और सुझावों पर विचार किया जाएगा तथा इस संबंध में उचित निर्णय लिया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी