भारतीय संस्कृति से ही निकलेगा जल संकट का समाधान : सुनील आम्बेकर
- राष्ट्रधर्म मासिक के विशेषांक ‘जल है तो कल है’ का विमोचन
लखनऊ, 25 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर ने रविवार को लखनऊ स्थित भागीदारी भवन में राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के विशेषांक ‘जल है तो कल है’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जल संकट का समाधान केवल सरकारी योजनाओं और तकनीकी उपायों से संभव नहीं है। जल संकट का समाधान आपसी संघर्ष के बजाय सामूहिक जिम्मेदारी निभाने से निकलेगा। इसके लिए समाज की सोच, संस्कार और जीवनशैली में बदलाव लाना होगा। पानी को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का आधार मानकर उसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। भारतीय संस्कृति में नदियों को मां के समान पूजनीय और जल को जीवन का आधार माना गया है। इस सांस्कृतिक दृष्टि को व्यवहार में उतारकर जल संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
सुनील आम्बेकर ने कहा कि जल संकट केवल पानी की कमी का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारे व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। मनुष्य सृष्टि का स्वामी नहीं, बल्कि उसका अभिन्न अंग है। इसलिए विकास की योजनाओं में मनुष्य के साथ पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों, नदियों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का भी ध्यान रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पानी किसी एक राज्य, वर्ग या समूह का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र से जुड़ा प्रश्न है। शहरों की योजना बनाते समय भी पानी की उपलब्धता, वर्षा, जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। अनियोजित शहरीकरण और संसाधनों के अत्यधिक दोहन से जल संकट बढ़ता है। आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के हितों की रक्षा करना भी जरूरी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने कहा कि जल संरक्षण का काम केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए समाज को आगे आकर सामूहिक जिम्मेदारी निभानी होगी।
पद्मश्री डॉ पोपटराव पवार ने कहा कि पानी की उपलब्धता के अनुसार खेती, चराईबंदी, कुल्हाड़बंदी और नशाबंदी जैसे सामूहिक प्रयासों ने गांव में सकारात्मक बदलाव लाने में भूमिका निभाई। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण योजना तैयार करने और ग्रामसभा की भागीदारी से उसे लागू करने पर जोर दिया।
राष्ट्रधर्म के संपादक अशोक वाजपेयी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंच परिवर्तन में पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण विषय है और जल संरक्षण इसका अभिन्न हिस्सा है। इसी उद्देश्य से ‘जल है तो कल है’ विशेषांक तैयार किया गया है। विशेषांक का उद्देश्य जल संकट पर देशव्यापी चर्चा को प्रोत्साहित करना तथा पारंपरिक ज्ञान और सफल मॉडलों को व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में प्रयास करना है।
कार्यक्रम का संचालन संपादक मंडल के सदस्य डॉ अनुज मिश्रा ने किया, जबकि प्रभारी निदेशक सर्वेशचंद्र द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य सुरेश सोनी की पुस्तक ‘हमारी सांस्कृतिक विचारधारा के मूल स्रोत’ के सातवें संस्करण का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में प्रान्त प्रचारक कौशल, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष, राष्ट्रधर्म के निदेशक एवं सहक्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोज कांत, राज्य सूचना आयुक्त पी.एन. द्विवेदी, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ बी.एन. सिंह, प्रान्त सम्पर्क प्रमुख गंगा सिंह, प्रान्त प्रचार प्रमुख डॉ अशोक कुमार दुबे, वरिष्ठ प्रचारक अशोक केडिया, प्रान्त समरसता प्रमुख राजकिशोर डॉ हरनाम सिंह, देवेंद्र अस्थाना, प्रशांत भाटिया, विभाग प्रचारक अनिल, डॉ ओम प्रकाश सिंह, सहित राष्ट्रधर्म से जुड़े पदाधिकारी, लेखक और अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

