चार महासागरों की यात्रा पूरी करके घर लौटीं नौ सैन्य महिला अधिकारी सम्मानित
- राजनाथ सिंह से मुलाकात में महिला अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए
नई दिल्ली, 30 जुलाई (हि.स.)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को तीनों सेनाओं की उन नौ महिला अधिकारियों को सम्मानित किया, जिन्होंने भारतीय सेना की सेलिंग वेसल आईएएसवी त्रिवेणी पर सवार होकर पहली बार चार महासागरों की यात्रा पूरी करके घर लौटीं। नई दिल्ली में रक्षा मंत्री ने लगभग 25,500 नॉटिकल मील की दूरी तय करते हुए 314 दिन की यात्रा पूरा करने में टीम की हिम्मत और पक्के इरादे को सराहा। उन्होंने इस 'समुद्र प्रदक्षिणा' को नारी शक्ति का सबूत और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल का शानदार उदाहरण बताया, जो हर भारतीय को प्रेरित करेगा।
महिला अधिकारियों ने राजनाथ सिंह के साथ अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इस अभियान के दौरान मुश्किल मौसम ने उनके सफर को यादगार और फायदेमंद बना दिया। उन्होंने कहा कि देश को गर्व महसूस कराने के उनके पक्के इरादे ने उन्हें प्रोत्साहित किया, जिससे वे बड़ी शारीरिक और मानसिक चुनौतियों को पार कर पाईं। रक्षा मंत्री ने कहा कि उनकी कामयाबी दिखाती है कि कैसे पक्का यकीन और पक्का इरादा किसी को ज़िंदगी में कोई भी लक्ष्य हासिल करने में मदद कर सकता है।
महिला अधिकारियों की काबिलियत और आत्मविश्वास को अविश्वसनीय बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ के सफल समापन ने उन पुरानी सोच को तोड़ दिया है, जिनमें कहा जाता था कि महिलाएं मुश्किल मिलिट्री मिशन पूरे नहीं कर सकतीं। उन्होंने ऑफिसर्स से कहा कि आपने साबित कर दिया है कि शारीरिक काबिलियत, मानसिक दृढ़ता और लीडरशिप क्वालिटी जेंडर से बंधी नहीं हैं। भारत की हर बेटी आपको देखकर यकीन कर सकती है कि वह भी समंदर पार करके दुनिया जीत सकती है। यह एक्सपीडिशन इस बात का सबूत है कि अगर हम साथ मिलकर आगे बढ़ें तो कोई भी लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं है।
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर और तीनों सेनाओं के अन्य वरिष्ठ अधिकारी बातचीत के दौरान मौजूद थे। आईएएसवी त्रिवेणी की टीम को रक्षा मंत्री ने 22 जुलाई 2026 को मुंबई में वर्चुअली हरी झंडी दिखाई थी। उन्होंने 11 सितंबर 2025 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए फ्लैग-ऑफ समारोह में शिरकत की थी। अपनी शानदार समुद्री कामयाबी के अलावा ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ ने सैन्य कूटनीति के ताकतवर जरिए के तौर पर भी काम किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम

