'ऑपरेशन सिंदूर' में तीनों सेनाओं को थी हमले की खुली छूट : राजीव घई
- पहली सालगिरह पर आज शाम ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी फिल्म रिलीज की जाएगी
नई दिल्ली, 07 मई (हि.स.)। पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह पर तीनों सेनाओं ने अपनी उपलब्धियों के बारे में देश को बताया। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने बहुत सोच-समझकर और सही तरीके से अपने पुराने तरीकों से आगे बढ़कर लाइन ऑफ कंट्रोल और पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस दौरान सेनाओं को खुली छूट दी गई, जिससे जमीन, हवा और समुद्री क्षमताओं के साथ फैसले लेकर दुश्मन को सबक सिखाया जा सका।
भारतीय सेना ने पिछले साल 7 मई को पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। तब पाकिस्तान से लगती लंबी सीमा, सैन्य ठिकानों की मौजूदगी और सीमावर्ती जिलों की संवेदनशीलता के कारण 'ऑपरेशन सिंदूर' का प्रमुख केंद्र राजस्थान रहा था। ऐसे में सेना ने फिर ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए राजस्थान को चुना है।
जयपुर मिलिट्री स्टेशन स्थित मुख्यालय दक्षिण पश्चिमी कमान में आज ही संयुक्त कमांडरों का सम्मेलन होगा। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में देश की सैन्य रणनीति, समन्वय और सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रक्षा मंत्री होंगे, जबकि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और थल, जल एवं वायु सेना के प्रमुख भी इसमें भाग लेंगे। शाम को इसी कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी एक फिल्म भी रिलीज की जाएगी।
ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत के सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) रहे लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने आज जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने बहुत सोच-समझकर और सही तरीके से अपने पुराने तरीकों से आगे बढ़कर लाइन ऑफ कंट्रोल और पाकिस्तान के साथ हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार आतंकी ठिकानों को टारगेट किया। ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं का साझा प्रयास था। इसमें जमीन, हवा और समुद्री क्षमताओं को एक साथ लाया गया, जिसमें हालात की जानकारी, कॉमन ऑपरेशन और इंटेलिजेंस तस्वीरें और रियल टाइम में फैसले लेने की क्षमता शामिल थी।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान स्ट्राइक करके कुल 9 लक्ष्यों को निशाना बनाया गया, जिनमें से 7 भारतीय सेना ने और दो भारतीय वायु सेना ने किए। एकदम सही समय पर किए गए यह सभी हमले पूरी तरह से हैरान करने वाले थे। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर एवं पाकिस्तान के बीचों-बीच बनाए गए ठिकानों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया, जिससे दुश्मन को संकेत दिया गया कि भारत की नजर में कोई भी आतंकी ठिकाना सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर कोई अंत नहीं था। यह तो बस शुरुआत थी। आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी। एक साल बाद हम सिर्फ ऑपरेशन ही नहीं बल्कि उसके पीछे के सिद्धांत को भी याद करते हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के पूरे सरकारी अप्रोच को दिखाया, जो युद्ध के मैदान में घड़ी की तरह काम करता था। रक्षा मंत्रालय, ख़ुफिया एजेंसियां, साइबर और इन्फॉर्मेशन ऑपरेशन इंस्टीट्यूशन, बॉर्डर गार्डिंग और पैरामिलिट्री फोर्स ने आर्म्ड फोर्स के साथ मिलकर एक ऐसा ऑपरेशन किया, जिसे अब दुनिया भर में मिलिट्री और स्ट्रेटेजिक रूप से गोल्ड स्टैंडर्ड माना जा रहा है। शुरू से ही सरकार ने हमें दो साफ निर्देश दिए, जिसमें आतंक पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म और कमजोर करने के लिए पाकिस्तान के बेस से भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने का मकसद बहुत साफ-साफ बताया गया था, जबकि सशस्त्र बलों को इस ऑपरेशन की योजना बनाने और उसे पूरा करने के लिए खुली छूट दी गई।
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि 'आत्मनिर्भर भारत' सिर्फ एक नारा नहीं है, यह सच में एक ताकत बढ़ाने वाला है। आज हमारे 65 फीसदी से ज्यादा रक्षा उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं। दुनिया भर में लंबे समय तक चलने वाले झगड़ों के दौर में हमने जोरदार हमला किया, साफ तौर पर तय मकसद हासिल किए। इसी का नतीजा रहा कि पाकिस्तानियों को बातचीत करने के लिए मजबूर होना पड़ा और उन्होंने हमसे रुकने का अनुरोध किया, तो हमने दुश्मनी खत्म करने का फैसला किया। ख़ुफ़िया एजेंसियों ने सही जानकारी दी, जो सटीक निशाना लगाने के लिए बहुत जरूरी है। साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट्स ने जानकारी का दबदबा बनाए रखा।
तत्कालीन डीजीएमओ घई ने कहा कि इस ऑपरेशन ने स्वदेशी क्षमता को भी दिखाया। इसमें इस्तेमाल होने वाले हथियार सिस्टम, गोला-बारूद, रॉकेट और मिसाइल, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही विकसित और उत्पादित किया गया था। ब्रह्मोस, आकाश, एडवांस्ड सर्विलांस और टारगेटिंग सिस्टम के साथ-साथ देसी गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स, सभी ने अहम भूमिका निभाई। स्वदेशी इक्विपमेंट का मतलब सिर्फ आत्मनिर्भरता ही नहीं था बल्कि इन्हें हमारी ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से ढालने, सप्लाई चेन को बनाए रखने और तेज़ी और कॉन्फिडेंस के साथ जवाब देने की फ्लेक्सिबिलिटी भी थी।
हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम

