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रेलवन ऐप के डाउनलोड 4.76 करोड़ के पार, रोजाना औसतन 10 लाख टिकट बुकिंग

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नई दिल्ली, 12 अगस्त (हि.स.)। भारतीय रेलवे के रेलवन ऐप के डाउनलोड की संख्या 4.76 करोड़ से अधिक हो गई है और इस ऐप के माध्यम से रोजाना औसतन 10 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं। इनमें 2.79 लाख आरक्षित और 7.24 लाख अनारक्षित टिकट शामिल हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यात्रियों को आरक्षित और अनारक्षित टिकट मोबाइल फोन से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रेलवन ऐप को 01 जुलाई 2025 को शुरू किया गया था।

रेलवन ऐप पर भारतीय रेलवे की यात्रियों से जुड़ी कई सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। इनमें आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग, ट्रेन की जानकारी, पीएनआर की जानकारी और रेल मदद जैसी सेवाएं शामिल हैं। एक ही लॉगिन के जरिए इन सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यात्रियों को अलग-अलग रेलवे ऐप डाउनलोड करने और कई पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती।

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2000 में शुरू की गई राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (एनटीईएस) यात्रियों को ट्रेन के चलने की लगभग वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराती है। इसमें ट्रेन के आने-जाने का समय, ट्रेन का समय-सारिणी, किसी ट्रेन की मौजूदा स्थिति और दो स्टेशनों के बीच चलने वाली ट्रेनों की जानकारी शामिल है।

एनटीईएस के जरिए वेबसाइट, मोबाइल ऐप, रेलवे पूछताछ केंद्र और 139 हेल्पलाइन के माध्यम से जानकारी हासिल की जा सकती है। वर्तमान में एनटीईएस पर रोजाना छह करोड़ से अधिक पूछताछ होती हैं और एक समय में करीब 80 हजार उपयोगकर्ता इसका इस्तेमाल करते हैं।

एनटीईएस के एंड्रॉयड ऐप को अबतक 4.5 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है, जबकि आईओएस ऐप के डाउनलोड की संख्या 16 लाख से अधिक है।

सरकार के अनुसार, ट्रेन की स्थिति और समय की जानकारी डिजिटल माध्यम से आसानी से उपलब्ध होने के कारण यात्रियों को रेलवे पूछताछ केंद्रों पर जाने की जरूरत कम हुई है। इससे पूछताछ केंद्रों पर कतार और प्रतीक्षा समय घटाने में भी मदद मिली है।

रेल मंत्री ने बताया कि वर्तमान में करीब 89 प्रतिशत आरक्षित टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं, जबकि 2013-14 में यह आंकड़ा करीब 49 प्रतिशत था। इसी तरह, विभिन्न गैर-काउंटर माध्यमों से बुक किए जाने वाले अनारक्षित टिकटों की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 39 प्रतिशत हो गई है।

उन्होंने बताया कि ट्रेन रद्द होने की स्थिति में ऑनलाइन बुक किए गए ई-टिकट का रिफंड निर्धारित प्रस्थान समय के बाद स्वचालित रूप से शुरू हो जाता है और लागू राशि यात्री के बैंक खाते में जमा कर दी जाती है। यह सुविधा फिलहाल ऑनलाइन बुक किए गए ई-टिकटों के लिए उपलब्ध है। काउंटर से खरीदे गए टिकटों के मामले में यात्री को रिफंड के लिए निकटतम यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) काउंटर पर जाना पड़ता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार