राघव चड्ढा का पलटवार-संसद में जनता के मुद्दे उठाने गया, हंगामा करने नहीं
नई दिल्ली, 04 अप्रैल (हि.स.)। आम आदमी पार्टी (आआपा) का अंदरूनी तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने पार्टी नेताओं द्वारा उनपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह संसद में प्रभावी ढंग से जनता के मुद्दे उठाने गए हैं न कि हंगामा करने।
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर वीडियो जारी कर कहा कि `उनके खिलाफ एक अभियान चलाया जा रहा है। एक जैसी भाषा, एक जैसे आरोप। उनके खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है, जो एक संगठित हमला है। आम आदमी पार्टी ने उन पर तीन आरोप लगाए हैं। पहला आरोप यह कि जब विपक्ष संसद से वॉकआउट करता है तो राघव चड्ढा वहीं बैठे रहते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि यह सरासर झूठ है। मैं चुनौती देता हूं कि एक भी उदाहरण दिखा दीजिए जब विपक्ष ने वॉकआउट किया हो और मैंने उनका साथ न दिया हो।'
उन्होंने कहा कि दूसरा आरोप यह था कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। `यह भी सफेद झूठ है। न तो किसी नेता ने उनसे इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने को कहा, न औपचारिक रूप से, न अनौपचारिक रूप से। पार्टी के 10 राज्यसभा सदस्यों में से 6-7 ने खुद इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए। तो दोष सिर्फ उन पर क्यों मढ़ा जा रहा है? इस प्रस्ताव के लिए कुल 50 हस्ताक्षर चाहिए थे, जो विपक्षी सांसदों की संख्या को देखते हुए आसानी से पूरे हो गए थे।'
उन्होंने कहा कि तीसरा आरोप यह था कि वह डर गए हैं और बेकार मुद्दे उठाते हैं। `मैं संसद में शोर मचाने, चीखने-चिल्लाने, माइक तोड़ने या गाली देने नहीं गया। मैं जनता के मुद्दे उठाने गया हूं। मैंने जीएसटी, इनकम टैक्स, पंजाब के पानी, दिल्ली की हवा, सरकारी स्कूलों की हालत, पब्लिक हेल्थ केयर, रेलवे यात्रियों की समस्याएं, यहां तक कि मासिक धर्म स्वास्थ्य जैसे मुद्दे उठाए हैं। बेरोजगारी और महंगाई पर भी मैंने आवाज उठाई है। मेरा चार साल का ट्रैक रिकॉर्ड देख लीजिए। मैं संसद में इम्पैक्ट क्रिएट करने गया हूं, हंगामा करने नहीं।'
दरअसल, इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब 2 अप्रैल को आआपा ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया और उनकी जगह पार्टी सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल को उपनेता नियुक्त कर दिया। इसके बाद पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि सदन में आआपा कोटे से राघव चड्ढा को बोलने का समय न दिया जाए।
इसके जवाब में चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि उन्हें जब भी संसद में बोलने का मौका मिलता है, वह जनता के मुद्दे उठाते हैं। `क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? क्या उन्होंने कोई गलती की है? कोई उनके बोलने पर रोक क्यों लगाना चाहेगा? उन्होंने हवाई अड्डों पर महंगे खाने, सामान पहुंचाने वाली कर्मचारियों की समस्याएं, खाने में मिलावट, टोल प्लाजा और बैंक चार्जेज की लूट, मध्यम वर्ग पर कर का बोझ, कंटेंट क्रिएटर्स पर कार्रवाई, संचार कंपनियों की मनमानी जैसे मुद्दे उठाए हैं।'
राघव चड्ढा के इस वीडियो के बाद सौरभ भारद्वाज, आतिशी, संजय सिंह जैसे आआपा नेताओं ने वीडियो जारी कर उनके खिलाफ हल्ला बोल शुरू कर दिया था। सौरभ भारद्वाज ने वीडियो जारी कर कहा कि `जो डर गया, समझो मर गया। राघव चड्ढा गंभीर मुद्दों पर चुप रहते हैं।' पार्टी सांसद संजय सिंह ने कहा कि `अरविंद केजरीवाल के साथी निडरता से मोदी के खिलाफ लड़ते हैं। यही हमने उनसे सीखा है। लेकिन जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आता है तो राघव दस्तखत नहीं करते। पश्चिम बंगाल में लोगों के वोट छीने जा रहे हैं, दिल्ली में चुनाव आयोग का दुरुपयोग हुआ, पंजाब के अधिकार छीने जा रहे हैं। इन सब पर वह खामोश रहते हैं।'
आतिशी ने कहा कि `राघव, भाजपा से इतने डरे हुए क्यों हैं? वह मोदी से सवाल पूछने से क्यों डरते हैं? आज लोकतंत्र और संविधान खतरे में है। चुनाव आयोग का दुरुपयोग हो रहा है। लेकिन वह इस पर सवाल नहीं उठाते। जब विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाता है तो वह हस्ताक्षर करने से मना कर देते हैं। महंगाई और एलपीजी सिलेंडर की कीमतें आम परिवारों के लिए संकट हैं लेकिन वह इस पर भी आवाज नहीं उठाते।'
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

