मप्र के गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण का लगभग 100 करोड़ से अधिक के आभूषणों से होगा राजसी श्रृंगार
- प्रदेशभर में होंगे सांस्कृतिक आयोजन, 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में होगी विशेष साज-सज्जा
भोपाल/ग्वालियर, 03 सितम्बर (हि.स.) । मध्य प्रदेश सहित देशभर में शुक्रवार, 4 सितम्बर को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जायेगा। जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर प्रदेश के ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में भगवान श्री राधा-कृष्ण का श्रृंगार सिंधिया रियासतकालीन लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के बेशकीमती आभूषणों से किया जाएगा। इन दुर्लभ गहनों को बैंक लॉकर से निकालकर सुरक्षा घेरे में मंदिर लाया जाएगा, जहां लगभग डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
दरअसल, ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में जन्मोत्सव का आयोजन बेहद भव्य और राजसी अंदाज में मनाया जाएगा। जन्माष्टमी के दिन भगवान राधा-कृष्ण को करोड़ों रुपये कीमत के गहनों से सजाया जाता है। इनमें सफेद मोती वाला पंचगढ़ी हार (मोती की पांच लड़ियों वाला हार), सात लड़ी हार, सोने के तोड़े, सोने का मुकुट, हीरे जड़े कंगन, हीरे और सोने की बांसुरी, 249 शुद्ध मोतियों की माला, पुखराज और माणिक जड़ा हुआ 3 किलो का मुकुट और सोने की नथ समेत कई गहने शामिल हैं। ये रियासत कालीन जेवरात हैं, जो हीरे-रत्न जड़ित हैं. इन एंटिक गहनों की कीमत 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। हीरे मोती पन्ना जैसे कीमती रत्नों से सुसज्जित भगवान के मुकुट और अन्य आभूषण हैं।
बेशकीमती गहने सालभर बैंक के लॉकर में रहते हैं। जन्माष्टमी के दिन 24 घंटे के लिए इन गहनों को सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंदिर लाया जाता है। नगर निगम आयुक्त द्वारा गठित विशेष समिति 4 सितंबर को सुबह 10 बजे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पहुंचकर आभूषणों को लॉकर से निकालेगी। कड़े पुलिस पहरे के बीच इन गहनों को मंदिर लाकर सबसे पहले उनकी सफाई की जाएगी और फिर भगवान राधा-कृष्ण का दिव्य श्रृंगार होगा। गहनों की सुरक्षा और दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा। परिसर में एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी ताकि लोग लाइव दर्शन कर सकें। इसके अलावा प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए जा रहे हैं। पूरा मंदिर परिसर आकर्षक लाइटिंग, रंगोली और विशेष फूल बंगले से सजाया जाएगा।
1843 में मराठा-यूरोपीय शैली में बना था मंदिर
गोपाल मंदिर का निर्माण सिंधिया राजवंश की महारानी बैजाबाई ने सन 1843 में करवाया था। सफेद संगमरमर से निर्मित इस मंदिर की वास्तुकला मराठा शैली और यूरोपीय प्रभाव का अद्भुत संगम है। मंदिर के गर्भगृह के मुख्य दरवाजे पूरी तरह चांदी से मढ़े हुए हैं, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।
55 जिलों के 111 स्थानों पर होंगे सांस्कृतिक आयोजन
प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने बताया है कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से मप्र शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा 4 सितंबर को ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का राज्य स्तरीय व्यापक आयोजन किया जा रहा है। ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ प्रदेश के सभी 55 जिलों में 111 स्थानों पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। राज्य के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी, जबकि भव्य जन्मोत्सव में 1500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करेंगे।
इस प्रदेशव्यापी पर्व का विशेष आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर भी होगा। यहाँ श्रीकृष्ण की विविध कलाओं और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे। भोपाल की कविता शाजी एवं समूह द्वारा श्रीकृष्ण नृत्य नाटिका, उज्जैन के डॉ. आशीष मेहता द्वारा मलखंब, सागर के जुगलकिशोर नामदेव द्वारा फूलों की होली तथा जबलपुर के तनिष्क शुक्ला एवं ग्रुप द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति दी जाएगी। जन्मोत्सव में मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जो श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज की उत्सव परंपरा की झलक प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री निवास पर होने वाले आयोजन में 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। कार्यक्रम उपरांत जानापाव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा परशुराम श्रीकृष्ण लोक का भूमिपूजन किया जायेगा।
कृष्णमय होगा मप्र, 1500 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ
‘श्रीकृष्ण पर्व’ के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं, गुरु-शिष्य परंपरा, मित्रता, भक्ति और लोक संस्कृति पर केंद्रित विविध सांस्कृतिक आयोजन होंगे। नारायणा धाम, सांदीपनि आश्रम, महिदपुर, पन्ना, अमझेरा और जानापाव सहित प्रदेश के अनेक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर नृत्य-नाटिका, रासलीला, भजन, लोकगायन और अन्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन आयोजनों में प्रदेश के 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार और विभिन्न सांस्कृतिक दल सहभागिता करेंगे।
नारायणा धाम में पांच दिवसीय आयोजन
उज्जैन के नारायणा धाम मंदिर प्रांगण में 2 से 6 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन होगा। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की स्मृति से जुड़े इस स्थल पर पहले दिन गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़े प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत दी जाएगी। इसमें श्रीकृष्ण और सुदामा के आश्रम के लिए लकड़ियां चुनने तथा सुदामा द्वारा गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने के प्रसंग को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ भरतनाट्यम, भजन गायन और ‘रासलीला : श्रीकृष्ण की दान लीला’ का मंचन होगा।
इसके अलावा महिदपुर के रामलीला चौक में 2 से 4 सितंबर तक शाम 7 बजे से कार्यक्रम होंगे। महू के जानापाव में 4 सितंबर को शाम 4 बजे भगवान परशुराम द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। वहीं, उमरिया, शहडोल, मंडला, दमोह, रीवा और खातेगांव सहित अनेक स्थानों पर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इनमें मथुरा प्रवेश, कृष्ण-सुदामा प्रसंग, गोवर्धन धारण, सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां शामिल हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

