पुष्कर में विदेशी महिला ने ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में कठिन साधना का लिया संकल्प
अजमेर, 07 मई (हि.स.)। पुष्कर में रूस मूल की विदेशी साधिका और नाथ संप्रदाय में दीक्षित योगिनी अन्नपूर्णा नाथ ने ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में कठिन अग्नि तपस्या का संकल्प लिया है। छोटी बस्ती स्थित श्मशान स्थल पर अघोरी सीताराम बाबा के आश्रम में उन्होंने नौ धधकती धूनियों के बीच 21 दिवसीय अग्नि तपस्या प्रारंभ की है।
यह तपस्या 3 मई से शुरू हुई है, जो 25 मई तक चलेगी। इस दौरान योगिनी अन्नपूर्णा नाथ प्रतिदिन सवा तीन घंटे तक धधकती धूनियों के मध्य बैठकर शिव साधना और गुरु बीज मंत्र का जाप करेंगी। साधना के दौरान प्रतिदिन हवन, पूजन और आरती का आयोजन भी किया जा रहा है। तपस्या की पूर्णाहुति 25 मई को संत भंडारे के साथ होगी।
योगिनी अन्नपूर्णा नाथ ने अपने गुरु बाल योगी दीपक नाथ रमते राम के सान्निध्य में इस तपस्या का आरंभ किया है। यह उनकी पहली अग्नि तपस्या है, जबकि उनके गुरु दीपक नाथ इससे पहले चार बार इस प्रकार की साधना कर चुके हैं और यह उनकी पांचवीं अग्नि तपस्या मानी जा रही है। इससे पूर्व अन्नपूर्णा नाथ चैत्र नवरात्रि के दौरान जयपुर घाट पर नौ दिवसीय खड़ेश्वरी तपस्या भी कर चुकी हैं।
बाल योगी दीपक नाथ के अनुसार यह तपस्या अत्यंत कठिन और तपस्वी जीवन का प्रतीक है। साधना के दौरान दोनों साधक प्रतिदिन शरीर पर गौमय भस्म का लेप कर सुबह 11 बजे से दोपहर 2:15 बजे तक 9 धधकती धूनियों के मध्य योग मुद्रा में बैठकर साधना कर रहे हैं। इन धूनियों को गोबर के कंडों से प्रज्वलित किया गया है और प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ाई जा रही है। अंतिम दिन 108 कंडों से धूनियां प्रज्वलित की जाएंगी। सभी धूनियों के बीच 3 से 4 फीट की दूरी रखी गई है, जिससे तपस्या का ताप और अधिक प्रभावी बनता है।
विदेशी भूमि से आकर भारतीय सनातन परंपरा में लीन होकर इतनी कठोर साधना करना श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आश्चर्य का विषय बना हुआ है। यह अग्नि तपस्या केवल आध्यात्मिक साधना ही नहीं, बल्कि विश्व कल्याण की भावना से जुड़ी प्रेरणादायक पहल भी मानी जा रही है। इन दिनों पुष्कर में चल रही यह तपस्या श्रद्धालुओं और साधु-संतों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

