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पुडुचेरी चुनाव 2026 : छोटा राज्य, लेकिन सियासी संकेत बड़े

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पुडुचेरी चुनाव 2026 : छोटा राज्य, लेकिन सियासी संकेत बड़े


पुडुचेरी, 01 अप्रैल (हि.स)। देश के पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के बीच केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी भले ही चर्चा में कम हो, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। राज्य की 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 15 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। राज्य में 9.44 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें लगभग पांच लाख महिला मतदाता शामिल हैं।

पुडुचेरी का इतिहास इसे देश के अन्य राज्यों से अलग बनाता है। वर्ष 2006 से पहले इसे पांडिचेरी के नाम से जाना जाता था। लगभग 138 वर्षों तक यह फ्रांसीसी उपनिवेश रहा और 1 नवंबर 1954 को भारत में शामिल हुआ। 16 अगस्त 1962 को इसे आधिकारिक रूप से केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिला। इसकी एक अनोखी विशेषता यह भी है कि इसके चार जिले-पुडुचेरी और कराईकल (तमिलनाडु), यानम (आंध्र प्रदेश) और माहे (केरल) भौगोलिक रूप से अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं। इसकी बिखरी हुई भौगोलिक संरचना प्रशासन और राजनीति दोनों को विशिष्ट बनाती है।

साल 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या लगभग 13.94 लाख है, जिसमें 68 प्रतिशत शहरी और 32 प्रतिशत ग्रामीण आबादी है। धार्मिक दृष्टि से हिंदू बहुसंख्यक (लगभग 87 प्रतिशत) हैं, जबकि मुस्लिम आबादी करीब 6 प्रतिशत है। हालांकि, यहां की राजनीति में जातीय या धार्मिक समीकरणों से ज्यादा स्थानीय नेतृत्व और गठबंधन अहम भूमिका निभाते हैं।

पुडुचेरी की राजनीतिक परिदृश्य की बात करें, तो वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने यहां की एक मात्र सीट जीतकर अपनी मौजूदगी मजबूत दिखाई, जहां वी. वैथिलिंगम सांसद बने। वहीं भारतीय जनता पार्टी के ए. नमस्सिवयम दूसरे स्थान पर रहे। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 30 में से 16 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इस गठबंधन के नेता एन. रंगासामी चौथी बार मुख्यमंत्री बने।

मुख्यमंत्री रंगासामी राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा

वास्तव में एन. रंगासामी पुडुचेरी की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं। उन्होंने वर्ष 2011 में कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई और तब से स्थिर नेतृत्व का विकल्प बने हुए हैं। उनका मुख्य फोकस विकास और प्रशासन पर रहा है, साथ ही वे पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग भी लगातार उठाते रहे हैं। वहीं विपक्ष की ओर से वी. नारायणसामी के नेतृत्व में सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) चुनौती पेश कर रहा है, जिसमें कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, सीपीआई, सीपीआई (एम)और वीसीके जैसे दल शामिल हैं।

राजग में एआईएनआरसी, भाजपा, अन्नाद्रमुक, पीएमके और एलजेके शामिल हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन अपेक्षाकृत मजबूत और संगठित नजर आता है। वहीं एसपीए गठबंधन में कांग्रेस और द्रमुक के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान देखने को मिली है, जिससे विपक्ष की स्थिति कमजोर पड़ सकती है।

चुनाव में नरेन्द्र माेदी का प्रभाव राजग के लिए बड़ा फैक्टर

इस चुनाव में विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और पूर्ण राज्य का दर्जा प्रमुख मुद्दे हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन विकास कार्यों और केंद्र सरकार के समर्थन के आधार पर वोट मांग रहा है, तो विपक्ष भ्रष्टाचार, प्रशासनिक कमजोरियों और अधूरे वादों को मुद्दा बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रभाव और केंद्र का समर्थन भी राजग के लिए एक बड़ा फैक्टर माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का आधार अभी भी बना हुआ है, लेकिन द्रमुक तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। एम.के. स्टालिन भी इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाना चाहते हैं। मुकाबला फिलहाल सीधा है। एक तरफ रंगासामी के नेतृत्व वाला सत्तारूढ़ गठबंधन और दूसरी तरफ कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन। निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं, जैसा कि पिछले चुनाव में 6 निर्दलीयों की जीत से देखा गया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि पुडुचेरी का यह चुनाव भले ही छोटे राज्य का हो, लेकिन इसके परिणाम बड़े राजनीतिक संकेत देने वाले होंगे। यह तय करेगा कि क्या सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी पकड़ बनाए रखता है या विपक्ष एकजुट होकर सत्ता में वापसी कर पाता है। जहां यह चुनाव कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है, वहीं राजग के लिए दक्षिण में विस्तार का अवसर भी है। अब सबकी नजर 4 मई को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उदय कुमार सिंह