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टीवी चैनल आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज से बचें, राष्ट्रविरोधी सामग्री न दिखाएंः सरकार

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टीवी चैनल आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज से बचें, राष्ट्रविरोधी सामग्री न दिखाएंः सरकार


नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (हि.स.)। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए बुधवार को एक सख्त एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि वे आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज से बचें, भड़काऊ बहस और राष्ट्रविरोधी सामग्री न दिखाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल में सावधानी बरतें।

मंत्रालय ने एडवाइजरी में सभी सैटेलाइट टीवी चैनलों को कार्यक्रम संहिता का सख्ती से पालन करने के आदेश दिए हैं।

मंत्रालय ने कहा है कि उनकी अंतर-विभागीय समिति ने पाया है कि चैनलों पर प्रसारित खबरें और दृश्य संहिता के अनुरूप नहीं हैं और एक ही तरह के दृश्य बार-बार दिखाए जा रहे हैं।

आदेश के मुताबिक आतंकवाद विरोधी अभियानों का लाइव कवरेज पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ऑपरेशन समाप्त होने तक केवल अधिकृत अधिकारी की ब्रीफिंग ही प्रसारित की जा सकेगी। पुराने दृश्यों पर टाइम-स्टैम्प लगाना अनिवार्य होगा।

हिंसक और परेशान करने वाले दृश्यों को लेकर भी चैनलों को सतर्क रहने को कहा गया है। ऐसे दृश्यों को लूप में बार-बार न दिखाने और जरूरत पड़ने पर ब्लर या मास्किंग का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।

अपराध से जुड़ी खबरों में सनसनीखेज रिपोर्टिंग से बचने और सत्यापित तथ्यों पर आधारित कवरेज करने को कहा गया है। टीवी चैनलों को महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

प्राकृतिक आपदाओं और हादसों की रिपोर्टिंग में टाइम-स्टैम्प का इस्तेमाल अनिवार्य होगा, ताकि दर्शकों में दहशत न फैले।

मंत्रालय ने सभी चैनलों को केवल भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा प्रकाशित भारत के प्रामाणिक मानचित्र का ही उपयोग करने का आदेश दिया है।

लाइव डिबेट को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली टिप्पणियों पर रोक लगाने, पैनलिस्टों का सावधानी से चयन करने और आपत्तिजनक टिप्पणियों को म्यूट करने या डिस्क्लेमर चलाने को कहा गया है।

इसके साथ

यौन अपराध पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर पूरी तरह रोक रहेगी। पीड़ित से जुड़ी कोई भी जानकारी, फोटो या पारिवारिक विवरण नहीं दिखाया जा सकेगा।

मंत्रालय ने एआई और जेनरेटिव एआई टूल्स के इस्तेमाल में भी सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि खबरों की सटीकता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम संहिता का उल्लंघन करने पर केबल टेलीविजन नेटवर्क अधिनियम-1995 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी