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राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति ने जनगणना-2027 के स्व-गणना अभियान में लिया हिस्सा

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राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति ने जनगणना-2027 के स्व-गणना अभियान में लिया हिस्सा


नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को जनगणना-2027 के स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) अभियान में भाग लेते हुए अपने-अपने परिवार का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया। राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में जबकि उपराष्ट्रपति ने उपराष्ट्रपति भवन में इस प्रक्रिया को पूरा किया।

यह पहली बार है जब देश की जनगणना पूरी तरह डिजिटल मोड में आयोजित की जा रही है और स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध कराया गया है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आधिकारिक पोर्टल पर अपनी पारिवारिक जानकारी दर्ज की। इस दौरान गृह सचिव गोविंद मोहन, भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

वहीं, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में ऑनलाइन स्व-गणना फॉर्म भरा। इस दौरान रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण भी मौजूद रहे।

एक सोशल मीडिया पोस्ट में, उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने-अपने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा निर्धारित अवधि में आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करें।

उन्होंने कहा कि यह जनगणना ‘डिजिटल इंडिया’ पहल के अनुरूप आयोजित की जा रही है, जिसमें व्यापक डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर डेटा संग्रहण और प्रसार को अधिक गुणवत्तापूर्ण, कुशल और समयबद्ध बनाया जा रहा है।

दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना मानी जाने वाली जनगणना-2027 का पहला चरण आज से शुरू हो गया है। पहली बार यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल रूप में आयोजित की जा रही है और इसमें ‘स्व-गणना’ का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है।

पहले चरण के तहत 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, एनडीएमसी और दिल्ली छावनी बोर्ड, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में स्व-गणना की प्रक्रिया संचालित की जा रही है।

इसके बाद दूसरे चरण में 16 अप्रैल से 15 मई तक मकान सूचीकरण और आवास जनगणना की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसमें घर-घर जाकर आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।

सरकार के अनुसार, डिजिटल जनगणना से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक होगी, जिससे डेटा प्रबंधन और विश्लेषण में भी सुधार होगा।

उल्लेखनीय है कि भारत में जनगणना का संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 (समय-समय पर संशोधित) के तहत किया जाता है। भारत की पिछली जनगणना वर्ष 2011 में संपन्न हुई थी।

जनगणना-2027 देश की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद की आठवीं जनगणना है, जो देश की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार