प्रतिभा को केवल अवसर और मार्गदर्शन की जरूरतः राष्ट्रपति
नई दिल्ली, 02 जून (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ के अंतर्गत आयोजित ‘नव भारत में बिरसा की जीवंत विरासत सप्ताह’ के दौरान छात्रवृत्ति योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उसे खोजने, तराशने तथा उचित मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराने की है। यदि सही अवसर मिलें तो गांवों, दूरदराज के क्षेत्रों और जनजातीय अंचलों के युवा भी देश का नाम रोशन कर सकते हैं। राष्ट्रपति ने जनजातीय युवाओं का आह्वान किया कि वे भगवान बिरसा मुंडा की विरासत से प्रेरणा लेकर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
राष्ट्रपति ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में मंत्रालय की प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाओं के जनजातीय लाभार्थियों को संबोधित किया। यह कार्यक्रम 10 मई से 9 जून तक मनाए जा रहे ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ के तहत ‘नए भारत में बिरसा की जीवंत विरासत सप्ताह’ के दौरान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके, राष्ट्रपति की सचिव दीप्ति उमाशंकर, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा मंत्रालय की तीन प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाएं अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति, जनजातीय विद्यार्थियों के लिए उच्चस्तरीय शिक्षा राष्ट्रीय छात्रवृत्ति और राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना के 200 चयनित लाभार्थी शामिल हुए।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने यह बताया कि भारत सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं ने किस प्रकार उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है और उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर प्रदान किया है। ऐसी सफलता की कहानियां देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। देश के दूरस्थ गांवों और जनजातीय अंचलों में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल यह सुनिश्चित करने की है कि उन्हें उचित मार्गदर्शन, सहयोग और मंच मिले। आज यहां उपस्थित विद्यार्थियों की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि अवसर मिलने पर जनजातीय समुदाय के युवा भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा सशक्तीकरण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षा व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक और सक्षम बनाती है तथा उसके जीवन की दिशा बदल सकती है। उनकी अपनी जीवन यात्रा में भी शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और इसी कारण वे जनजातीय समाज के लोगों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करने का लगातार प्रयास करती हैं।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके समाज, संस्कृति और परंपराओं से होती है। यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान को भूल जाता है तो वह अपने दायित्वों से भी दूर हो जाता है। इसलिए जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को भी सहेजकर रखना चाहिए। आज भी अनेक प्रतिभाशाली छात्र केवल इसलिए अवसरों से वंचित रह जाते हैं क्योंकि उन्हें विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं और सरकारी सुविधाओं की जानकारी नहीं मिल पाती।
कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि राष्ट्रपति लगातार जनजातीय समुदाय के विद्यार्थियों और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों का उत्साहवर्धन करती रही हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है और इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी पहलें जनजातीय समुदाय के विकास को नई गति प्रदान कर रही हैं और राष्ट्रपति का मार्गदर्शन मंत्रालय के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

