इंडिया से भारत की साकार होती यात्रा : सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नया दौर चल रहा: मुख्यमंत्री यादव
भोपाल, 05 मई (हि.स.)। “इंडिया से भारत” की यात्रा आज आंखों के सामने साकार होती दिखाई दे रही है। यह सिर्फ एक पुस्तक नहीं, बल्कि देश के वैचारिक, सांस्कृतिक और आत्मगौरवपूर्ण पुनर्जागरण की सजीव कथा है। उक्त बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में प्रज्ञा प्रवाह मध्यभारत प्रांत द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में मंगलवार को कही।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक प्रशांत पोल की पुस्तक “इंडिया से भारत-एक प्रवास” का विमोचन किया गया, जिसे मुख्यमंत्री ने देश के वैचारिक, सांस्कृतिक और आत्मगौरवपूर्ण पुनर्जागरण का दस्तावेज बताया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
उन्होंने कहा, “इंडिया से भारत” केवल एक पुस्तक नहीं है, यह देश के वैचारिक, सांस्कृतिक और आत्मगौरवपूर्ण पुनर्जागरण की जीवंत कथा प्रस्तुत करती है। वर्ष 2014 से 2026 तक का कालखंड भारत के इतिहास में स्वर्णिम युग के रूप में देखा जाएगा, जिसे आज देशवासी प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रज्ञा प्रवाह जैसी संस्थाओं की भूमिका को इस वैचारिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कुप्रचार के विरुद्ध तथ्य, विचार और संस्कृति के माध्यम से संघर्ष करना ही भारत की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण में प्रज्ञा प्रवाह की भूमिका को निर्णायक बताया और कहा कि यह संगठन 1987 से देश की बौद्धिक शक्ति को संगठित कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में सक्रिय है।
उन्होंने कहा कि लेखक प्रशांत पोल ने इस पुस्तक में भारत की उस परिवर्तनशील यात्रा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है, जिसमें देश ने औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर आत्मसम्मान, सांस्कृतिक चेतना और मजबूत नेतृत्व को पुनः स्थापित किया है। स्वतंत्रता के बाद कई ऐसे अवसर आए जब भारत अपने सामर्थ्य के अनुरूप निर्णय नहीं ले सका और इन ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख पुस्तक में साहसपूर्वक किया गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक एक वैचारिक रचना होने के साथ ही भारत को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त प्रयास है। लेखक प्रशांत पोल लगातार भारतीय समाज को पाश्चात्य मानसिकता से बाहर निकालकर आत्मगौरव से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। यह पुस्तक नई पीढ़ी को अपनी पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब भारत की बात करना रूढ़िवादी माना जाता था, लेकिन आज देश में सांस्कृतिक चेतना का नया दौर शुरू हो चुका है। उन्होंने “अंग्रेजों भारत छोड़ो” के बाद अब वैचारिक स्तर पर “इंडिया भारत छोड़ो” जैसे आत्मबोध की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने पुस्तक-पठन की घटती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि किताबें चिंतन और आत्ममंथन का माध्यम होती हैं।
इस दौरान आयोजन में पुस्तक के लेखक प्रशांत पोल ने अपने संबोधन में बताया कि इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा उन्हें भारत के इतिहास की कुछ ऐसी घटनाओं से मिली, जिन्होंने देश की तत्कालीन मानसिकता और वैश्विक स्थिति को उजागर किया। उन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता की पाकिस्तान वायुसेना द्वारा की गई हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना उस समय भारत की कमजोर प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय चेतना की स्थिति को दर्शाती है।
उन्होंने 1969 में मोरक्को के रबात में आयोजित इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक में भारत को पाकिस्तान के विरोध के कारण अपमानजनक रूप से लौटाए जाने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं उस दौर के “हीन और लाचार भारत” की मानसिकता को दर्शाती हैं। श्री पोल ने कहा कि यदि भारत की आर्थिक प्रगति की तुलना श्रीलंका, पाकिस्तान, इज़राइल और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से की जाए, तो 21वीं सदी के प्रारंभ तक भारत कई मामलों में पीछे रहा। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि देश अपनी भाषा, संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से कटता चला गया, जिससे राष्ट्रीय आत्मगौरव कमजोर हुआ।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 भारत के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जिसके बाद देश में आत्मविश्वास, नेतृत्व और निर्णय क्षमता का नया दौर शुरू हुआ। कोविड काल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने न केवल स्वदेशी वैक्सीन विकसित की, बल्कि 100 से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराकर वैश्विक नेतृत्व का परिचय दिया। आज विश्व की लगभग 70 प्रतिशत वैक्सीन का निर्माण भारत में हो रहा है, जो “इंडिया से भारत” की यात्रा का प्रतीक है।
कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के अंतर्गत मध्य प्रदेश पॉलिसी रिसर्च एनालिसिस लीग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम विषय पर किए गए अध्ययन की रिपोर्ट अभिषेक शर्मा, संचिता जैन, डॉ. सविता भदौरिया एवं भूपेन्द्र सिंह जाटव द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के युवाओं में विमर्श के बिंदुओं से संबंधित अध्ययन रिपोर्ट को डॉ. राम बाबू मेहर, कोकिला चतुर्वेदी, अम्बुज तिवारी तथा अर्जुन सिंह ठाकुर द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह शोध कार्य प्रज्ञा प्रवाह के अंतर्गत गठित टीम द्वारा संपन्न किया गया है। इन शोध रिपोर्टों की प्रतियां मुख्यमंत्री को सौंपी गईं। उन्होंने कहा कि इन अध्ययनों को शासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे नीति निर्माण में इनका उपयोग किया जा सके।
इस अवसर पर प्रदेश के कई कैबिनेट मंत्री, शिक्षाविद, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक शर्मा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन धीरेंद्र चतुर्वेदी ने किया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

