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प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में विश्व की पहली ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का किया अवलोकन

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प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में विश्व की पहली ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का किया अवलोकन


प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में विश्व की पहली ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का किया अवलोकन


प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में विश्व की पहली ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का किया अवलोकन


प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में विश्व की पहली ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का किया अवलोकन


वाराणसी/भोपाल, 29 अप्रैल (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा विश्वनाथ को समर्पित विश्व की पहली ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का अवलोकन किया। यह घड़ी भारतीय वैदिक कालगणना पर आधारित है और आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्राचीन समय गणना पद्धति को जीवंत रूप देती है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वैशाख कृष्ण पक्ष प्रतिपदा, 3 अप्रैल 2026 को यह विशेष घड़ी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी। इसके अगले दिन 4 अप्रैल 2026 को इसे काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया।

मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार डॉ. श्रीराम तिवारी ने बताया कि कालगणना की नगरी उज्जैन में विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना की गई थी, जिसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 फरवरी 2024 को किया था। यह घड़ी वैदिक कालगणना के सभी प्रमुख घटकों को समाहित करती है और सूर्योदय के आधार पर संचालित होती है।

उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर सूर्योदय का समय होता है, उसी के अनुसार वहां की कालगणना इस घड़ी में प्रदर्शित होती है। साथ ही भारतीय मानक समय (आईएसटी), वैदिक समय, लोकेशन, भारतीय पंचांग, विक्रम संवत् मास, ग्रहों की स्थिति, भद्रा, चंद्र स्थिति और अन्य ज्योतिषीय जानकारियां भी इसमें उपलब्ध रहती हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी प्रवास के दौरान बाबा विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्वर्णमंडित गर्भगृह में विधिवत पूजन-अभिषेक किया। पूजा के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन किया और इसकी विशेषताओं की जानकारी ली।

डॉ. तिवारी ने बताया कि आने वाले समय में अयोध्या स्थित राम मंदिर सहित देश के सभी ज्योतिर्लिंगों में भी वैदिक घड़ी स्थापित करने की योजना है। इससे भारतीय संस्कृति, परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह घड़ी प्रतिदिन के सूर्योदय और सूर्यास्त की सटीक गणना के साथ दिन के 30 मुहूर्तों का विस्तृत और प्रमाणिक विवरण प्रदान करती है। यह आधुनिकता और परंपरा के समन्वय का सशक्त प्रतीक है, जो युवाओं को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।

क्या है ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’?

मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की पहली ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ विकसित की गई है। यह घड़ी एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय की गणना करती है और भारतीय समय परंपरा को डिजिटल स्वरूप में प्रस्तुत करती है। इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के अद्भुत संगम के रूप में देखा जा रहा है।------------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर