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प्रधानमंत्री मंगलवार को दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन करेंगे, सफर होगा सिर्फ ढाई घंटे का

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प्रधानमंत्री मंगलवार को दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन करेंगे, सफर होगा सिर्फ ढाई घंटे का


नई दिल्ली, 13 अप्रैल (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को बहुप्रतीक्षित दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन करेंगे। करीब 213 किलोमीटर लंबे इस छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर का निर्माण 12,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया गया है। यह परियोजना दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी को नई गति देगी।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 अप्रैल को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। सुबह लगभग 11:15 बजे प्रधानमंत्री दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के एलिवेटेड सेक्शन पर वन्यजीव गलियारे की समीक्षा करने के लिए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जाएंगे। सुबह लगभग 11:40 बजे प्रधानमंत्री देहरादून के पास स्थित 'जय मां दात काली मंदिर' में दर्शन और पूजा करेंगे। इसके बाद, दोपहर लगभग 12:30 बजे, प्रधानमंत्री देहरादून में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन करेंगे और इस अवसर पर जनसभा को संबोधित भी करेंगे।

इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय जो अभी 6 घंटे से अधिक है, घटकर लगभग 2.5 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुगम सफर का अनुभव मिलेगा।

परियोजना के तहत 10 इंटरचेंज, 3 रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी), 4 बड़े पुल और 12 वे-साइड सुविधाएं विकसित की गई हैं। साथ ही, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) भी लगाया गया है।

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस कॉरिडोर में कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए 12 किलोमीटर लंबा 'वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर' बनाया गया है, जो एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में से एक है। इसके अलावा 8 पशु मार्ग, 200-200 मीटर के दो हाथी अंडरपास और दात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी बनाई गई है।

यह कॉरिडोर क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, पर्यटन को प्रोत्साहित करने और व्यापार के नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संतुलन के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार