केंद्र में रहते हुए 12 वर्षों में निराशा को आशा में बदला : प्रधानमंत्री
नई दिल्ली, 22 जून (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि काम करने वाले सक्षम व्यक्ति से ही अपेक्षाएं की जाती हैं और आमजन ही नहीं बल्कि कांग्रेस भी उनसे ही कार्य पूरा करने की अपेक्षा करती है। उन्होंने कहा कि आज देश के युवाओं, गरीबों तथा मध्यम वर्ग में अपेक्षाएं पूरी होने का विश्वास दिखाई देता है।
एक टीवी चैनल की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने आज कहा कि उनकी सरकार ने 12 वर्षों में निराशा को आशा में बदला है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार के हर निर्णय और प्रयास के केंद्र में राष्ट्र प्रथम की भावना रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत किसी क्षणिक घटना पर प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं है बल्कि विकास और चुनौतियों दोनों का अनुभव रखने वाली प्राचीन सभ्यता है। उन्होंने कहा कि भारत के पास युगों का अनुभव है और आज जो निर्णय लिए जा रहे हैं, वे आने वाले एक हजार वर्षों के भविष्य की दिशा तय करेंगे। उन्होंने इसे दुनिया के लिए भारत की सबसे बड़ी गारंटी बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज केवल तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ही नहीं बल्कि एक विश्वसनीय अर्थव्यवस्था भी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व नेताओं से हुई बातचीत में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि भारत के लिए ‘नेशन फर्स्ट’ सबसे बड़ा मंत्र और सिद्धांत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, खादी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने जैसी पहलें इसलिए सफल हुईं क्योंकि देशवासियों ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उन्होंने इन अभियानों में योगदान देने वाले नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनभागीदारी ही इन सफलताओं की सबसे बड़ी शक्ति रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक आदिवासी क्षेत्र माओवादी हिंसा से प्रभावित रहे, जिसके कारण वहां विकास और बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकीं। उन्होंने बताया कि 2004 से 2014 के बीच माओवादी हिंसा की 17 हजार से अधिक घटनाएं हुईं और सात हजार से ज्यादा लोगों की जान गई। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद राष्ट्र प्रथम के संकल्प के साथ सरकार ने स्थिति बदलने का प्रयास किया और आज माओवादी आतंक अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है।
मोदी ने कहा कि देश के 100 से अधिक जिलों और 500 से अधिक विकासखंडों को वर्षों तक पिछड़ा क्षेत्र माना जाता था। सरकार ने इन क्षेत्रों को ‘पिछड़े’ के बजाय ‘आकांक्षी जिले’ और ‘आकांक्षी ब्लॉक’ का नाम दिया तथा विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि आज यही क्षेत्र राज्यों की विकास यात्रा को गति दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं और इसमें आकांक्षी जिलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में विकास, बुनियादी सुविधाओं और अवसरों के विस्तार ने लोगों में नई उम्मीद और आत्मविश्वास पैदा किया है, जो विकसित भारत के निर्माण की मजबूत नींव बन रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

