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देश को एकजुट, मजबूत बनाए रखने के लिए विभाजन के दर्द को याद रखना जरूरीः सच्चिदानंद जोशी

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देश को एकजुट, मजबूत बनाए रखने के लिए विभाजन के दर्द को याद रखना जरूरीः सच्चिदानंद जोशी


नई दिल्ली, 14 अगस्त (हि.स.)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने शुक्रवार को कहा कि ‘विभाजन विभीषिका समृति दिवस’ उस पीड़ा को स्मरण करने, जीवित बचे लोगों के अदम्य साहस को नमन करने तथा एकता एवं भाईचारे के संकल्प को अटूट बनाने के लिए है। उन्होंने कहा कि देश को एकजुट और मजबूत बनाए रखने के लिए विभाजन के दर्द को याद रखना जरूरी है।

डॉ. जोशी ने दिल्ली स्थित पार्टिशन म्यूज़ियम (दारा शिकोह लाइब्रेरी बिल्डिंग, लोथियन रोड) में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के कार्यक्रम में यह बात कही। यह कार्यक्रम आईजीएनसीए के सहयोग से आयोजित किया गया था।

डॉ. जोशी ने कहा कि बंटवारे की कहानियां सिर्फ इतिहास की किताबों में ही नहीं बल्कि जुबानी इतिहास, पारिवारिक तस्वीरों, दस्तावेजों और पीढ़ियों से चली आ रही निजी चीजों में भी जिंदा हैं। इसका मकसद दुनिया को इस त्रासदी के बारे में बताना भी है, जो अब तक के सबसे बड़े मानवीय विस्थापन में से एक है।

दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने नोट में लिखा कि विभाजन महज लकीरें खींचना नहीं था बल्कि लाखों लोगों को उनके घरों और जड़ों से बेदखल करना था। दिल्ली के लाजपत नगर, पंजाबी बाग, मॉडल टाउन और खान मार्केट जैसे इलाके उस इतिहास की गवाही देते हैं जो बेघर परिवारों के रिहैबिलिटेशन से बने। जिन लोगों ने बहुत कम चीज़ों के साथ यहां शुरुआत की, उन्होंने न सिर्फ अपनी जिंदगी को संवारा, बल्कि एक नए देश के निर्माण में भी अहम योगदान दिया।

उपराज्यपाल ने अपने दादाजी सरदार तेजा सिंह समुंद्री के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि मुश्किल हालात में सिर्फ जिंदा बच जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि साहस और सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ना असली हौसला है।

पार्टिशन म्यूज़ियम की संस्थापक एवं अध्यक्ष लेडी किश्वर देसाई ने बताया कि भारत की आज़ादी और बंटवारे के 80वें साल के खास मौके पर म्यूज़ियम शहर की सरकारों और युवा कलाकारों के साथ मिलकर एक नया प्रोजेक्ट शुरू करेगा। इसके तहत दिल्ली के लाजपत नगर, फ्रेंड्स कॉलोनी, खान मार्केट, किंग्सवे कैंप और अमृतसर तथा मुंबई के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की मूर्तियां लगाई जाएंगी। यह पहल उन शरणार्थियों के संघर्ष और हिम्मत को सम्मान देने के लिए की जा रही है जिन्होंने शून्य से अपनी ज़िंदगी दोबारा शुरू की थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी