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12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का समापन, साझा घोषणा पत्र पर बनी सहमति

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12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का समापन, साझा घोषणा पत्र पर बनी सहमति


नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (हि.स.)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को ब्रिक्स संसदीय मंच के समापन समारोह में कहा कि हमारे विचार और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं लेकिन मानवता के कल्याण, शांति और समृद्धि के प्रति हमारी प्रतिबद्धता एक समान है, यही ब्रिक्स की सबसे बड़ी ताकत है।

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का नई दिल्ली में मंगलवार को समापन हो गया। समापन सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पिछले दो दिनों में कई अहम मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति बनी है। इसमें यूएन चार्टर, राष्ट्रों की संप्रभु समानता और शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई है। साथ ही मंच से आतंकवाद के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा करते हुए यूएन की ओर से नामित आतंकवादियों और संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया गया है। उन्होंने 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण करने वाले चीन को शुभकामनाएं भी दीं।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज विश्व संघर्ष, अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में संवाद, विश्वास और सहयोग का महत्व बढ़ गया है। भारत का मानना है कि विश्व की समस्याओं का स्थायी समाधान संघर्ष में नहीं, संवाद में है, युद्ध में नहीं, शांति में है। हमें एक ऐसे विश्व के लिए काम करना चाहिए जहां हर राष्ट्र की संप्रभुता का सम्मान हो और विकास के अवसर सबको समान रूप से मिले।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संसद जनता की आशाओं की अभिव्यक्ति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। यह सिर्फ कानून बनाने का मंच नहीं बल्कि संवाद, जवाबदेही और जनविश्वास की संस्था है। इसलिए संसदों को समय के साथ अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनना होगा।

तकनीक पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक काम करने के तरीके बदल रही है। ‘जिम्मेदार तकनीक’ से संसदीय कामकाज प्रभावी हो सकता है और सांसदों की दक्षता बढ़ सकती है लेकिन एआई का उपयोग नैतिकता, पारदर्शिता और मानव कल्याण के सिद्धांतों पर होना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा