उत्तर रेलवे ने दिल्ली में ओएचई डेड जोन की समस्या का किया स्थायी समाधान
नई दिल्ली, 05 अगस्त (हि.स.)। उत्तर रेलवे ने दिल्ली मंडल में डफरिन ब्रिज तथा मिठाई पुल के नीचे स्थित ओवरहेड उपकरण (ओएचई) के डेड ज़ोन से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही परिचालन संबंधी समस्याओं का स्थायी तकनीकी समाधान विकसित कर लिया है। इस उपलब्धि से दिल्ली क्षेत्र में रेल परिचालन की विश्वसनीयता, समयपालन और गतिशीलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उत्तर रेलवे के अनुसार इन दोनों स्थानों पर पुलों के नीचे सीमित हेडरूम होने के कारण 50 मीटर से अधिक लंबे ओएचई डेड जोन बनाए गए थे। इन क्षेत्रों से गुजरते समय कई बार विद्युत लोकोमोटिव की विद्युत आपूर्ति बाधित हो जाती थी, जिससे वे बीच में ही रुक जाते थे। इसके कारण ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होता था और देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक पर विलंब की स्थिति उत्पन्न होती थी।
समस्या की गंभीरता को देखते हुए उत्तर रेलवे ने अप्रैल में मिशन मोड में इसके स्थायी समाधान पर कार्य शुरू किया। इस दौरान अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) तथा नॉर-ब्रेमसे इंडिया लिमिटेड (केबीआईएल) के सहयोग से विस्तृत तकनीकी जांच और मूल कारणों का विश्लेषण किया गया।
जांच में पाया गया कि वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (वीसीबी) की स्विचिंग के दौरान उत्पन्न वोल्टेज सर्ज, सीसीबी 2.0 ब्रेकिंग प्रणाली से लैस विद्युत लोकोमोटिव में अनपेक्षित रूप से आपातकालीन ब्रेक लगने का कारण बन रहे थे। इसके बाद केबीआईएल ने इलेक्ट्रॉनिक विजिलेंस कंट्रोलर (ईवीसी) के लिए उन्नत सॉफ्टवेयर विकसित किया, जिससे इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव हो सका।
उत्तर रेलवे ने बताया कि यह उन्नत सॉफ्टवेयर अब तक भारतीय रेल के 600 से अधिक विद्युत लोकोमोटिव में स्थापित किया जा चुका है। जिन लोकोमोटिव में यह सॉफ्टवेयर लगाया गया है, उनमें इस प्रकार की समस्या दोबारा सामने नहीं आई है। शेष लोकोमोटिव में भी विभिन्न लोको शेडों पर चरणबद्ध तरीके से सॉफ्टवेयर उन्नयन का कार्य जारी है।
रेलवे के अनुसार यह उपलब्धि डेटा-आधारित इंजीनियरिंग, तकनीकी नवाचार और विभिन्न संस्थाओं के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। रेलवे इंजीनियरों, आरडीएसओ और उद्योग साझेदारों के सहयोग से लंबे समय से चली आ रही इस परिचालन चुनौती का स्थायी समाधान विकसित किया गया है।
उत्तर रेलवे ने बताया कि इस तकनीकी सुधार से ट्रेनों के अनावश्यक ठहराव में कमी आई है, समयपालन बेहतर हुआ है तथा दिल्ली क्षेत्र में विद्युत रेल परिचालन अधिक सुचारु और विश्वसनीय बना है। यह उपलब्धि यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और भारतीय रेल की सतत तकनीकी उन्नयन की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

