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पूर्वोत्तर के लिए ‘वन साइज फिट्स ऑल’ मॉडल कारगर नहीं, राज्य-विशेष समाधान जरूरी : डॉ. भूटानी

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पूर्वोत्तर के लिए ‘वन साइज फिट्स ऑल’ मॉडल कारगर नहीं, राज्य-विशेष समाधान जरूरी : डॉ. भूटानी


आइजोल, 08 मई (हि.स.)। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी ने शुक्रवार को कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं, इसलिए सहकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में “एक जैसा मॉडल” प्रभावी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के लिए राज्य-विशेष समाधान और लचीले दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है।

मिजोरम की राजधानी आइजोल में आयोजित क्षेत्रीय सहकारी सुधार सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. भूटानी ने कहा कि यह कार्यशाला पूर्वोत्तर राज्यों की चुनौतियों और जमीनी आवश्यकताओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्य भूमि से दूरी, सीमित कनेक्टिविटी और स्थानीय परिस्थितियां सहकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में विशेष दृष्टिकोण की मांग करती हैं।

उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय पूर्वोत्तर राज्यों के साथ नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंस और समीक्षा बैठकों के माध्यम से लगातार संवाद बनाए हुए है ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके। डॉ. भूटानी ने कहा कि राज्यों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों और अनुभवों से मंत्रालय को जमीनी स्तर की वास्तविकताओं को समझने में मदद मिली है।

सहकारिता सचिव ने क्षमता निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि राज्य स्तर पर योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने, अवधारणा विकास और प्रभावी क्रियान्वयन क्षमता को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सहकारिता मंत्रालय पूर्वोत्तर राज्यों को सहकारी बैंकिंग, मानव संसाधन और वित्तीय सहायता सहित हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएगा।

उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकिंग सुधार मंत्रालय की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं और शहरी सहकारी बैंकों के लिए तकनीकी प्लेटफॉर्म का मानकीकरण करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे लागत कम होगी, दक्षता बढ़ेगी और ग्राहकों को आधुनिक बैंकिंग सेवाएं मिल सकेंगी।

डॉ. भूटानी ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना को पूर्वोत्तर राज्यों में मिशन मोड में लागू किया जाएगा। साथ ही सहकारी संस्थाओं के माध्यम से कृषि ऋण पहुंच बढ़ाने और भंडारण अवसंरचना मजबूत करने पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऑर्गेनिक खेती, बागवानी, मत्स्य पालन, बांस और पारंपरिक उत्पादों के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। राष्ट्रीय सहकारी नेटवर्क के जरिए इन उत्पादों को घरेलू और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। “भारत ऑर्गेनिक्स” जैसी पहलों के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी मंत्रालय जोर दे रहा है।

सम्मेलन में सहकारी बैंकिंग सुधार, साइबर सुरक्षा, एमपैक्स सुदृढ़ीकरण, डेयरी एवं मत्स्य सहकारी संस्थाओं, वैल्यू चेन विकास और मार्केट लिंकज जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ नाबार्ड, एनसीडीसी, एनडीडीबी, एनएफडीबी और एनईडीएफआई के अधिकारियों ने भी सम्मेलन में भाग लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार