केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय दंत आयोग का किया गठन
नई दिल्ली, 20 मार्च (हि.स.)। केन्द्र सरकार ने भारतीय दंत परिषद (डीसीआई) के स्थान पर राष्ट्रीय दंत आयोग (एनडीसी) और तीन स्वायत्त बोर्डों का गठन कर दिया है। इससे अब आयोग दंत चिकित्सा शिक्षा में आवश्यक और लंबे समय से प्रतीक्षित नियामक सुधारों को लागू करेगा और पूरे देश में किफायती देखभाल तक पहुंच को बढ़ाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय दंत आयोग और उसके बोर्डों के नेतृत्व के लिए अनुभवी और प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की नियुक्ति की गई है। डॉ. संजय तिवारी को एनडीसी का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि डॉ. मौसुमी गोस्वामी को अंशकालिक सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके अलावा विभिन्न बोर्डों में भी विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे इस नई व्यवस्था को मजबूत आधार मिल सके।
स्नातक एवं स्नातकोत्तर दंत चिकित्सा शिक्षा बोर्ड के लिए डॉ. चन्द्रशेखर जानकीराम को अध्यक्ष, डॉ. शैलेश माधव लेले को पूर्णकालिक सदस्य और डॉ. नागराज एम. को अंशकालिक सदस्य बनाया गया।
दंत मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड के लिए लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) नंदा किशोर साहू को अध्यक्ष, डॉ. हिमांशु ऐरन को पूर्णकालिक सदस्य और डॉ. परिमाला त्यागी को अंशकालिक सदस्य बनाया गया।
नैतिकता एवं दंत पंजीकरण बोर्ड के लिए लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) तापस कुमार बंद्योपाध्याय को पूर्णकालिक सदस्य, डॉ. उषा हेगड़े को पूर्णकालिक सदस्य और डॉ. स्वर्ग ज्योति दास को अंशकालिक सदस्य को बनाया गया।
राष्ट्रीय दंत आयोग का काम कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियम बनाना, डेंटल संस्थानों की रेटिंग और मूल्यांकन करना, मानव संसाधनों का मूल्यांकन करना और डेंटल रिसर्च को बढ़ावा देना, निजी डेंटल कॉलेजों में फीस विनिनयम के लिए दिशा निर्देश बनाना और सामुदायिक दंत देखभाल, शिक्षा, शौध और प्रोफेशनल नैतिकता के लिए मानक तय करना है। राष्ट्रीय दंत आयोग के तहत तीन स्वायत्त बोर्ड दंत शिक्षा, संस्थानों के मूल्यांकन और पेशेवर आचरण से जुड़े कार्यों को देखेंगे।
अरिंदम मोदक एनडीसी के सचिव के रूप में सचिवालय का नेतृत्व करेंगे। इस संबंध में अधिसूचनाएं 19 मार्च को जारी की गईं और एनडीसी का ढांचा उसी तिथि से प्रभावी हो गया।
उल्लेखनीय है कि, एनडीसी अधिनियम लागू होने के बाद से ही अब दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 निरस्त हो गया है और भारतीय दंत परिषद भंग कर दी गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

