उमर कैबिनेट विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस में नाराजगी, विधायकों ने फारूक अब्दुल्ला को भेजी मांगों की लिस्ट
श्रीनगर, 31 अक्टूबर (हि.स.)।
जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर नाराजगी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच खबर है कि पार्टी के कुछ विधायकों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को व्हाट्सएप के जरिए अपनी मांगों की एक सूची भेजी है। बताया जा रहा है कि इस सूची में मुख्यमंत्री के सलाहकार को हटाने और जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करवाने के लिए ठोस कदम उठाने जैसी मांगें शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे के बाद पार्टी के कुछ विधायकों में असंतोष की चर्चा है। इसी सिलसिले में विधायकों ने अपनी चिंताओं और मांगों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने की कोशिश की है। बताया जा रहा है कि विधायकों की नाराजगी केवल मंत्री पद नहीं मिलने तक सीमित नहीं है बल्कि सरकार के कामकाज और कुछ फैसलों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार विधायकों ने अपनी मांगों में मुख्यमंत्री के सलाहकार को पद से हटाने का मुद्दा उठाया है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की दिशा में पार्टी और सरकार से अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की गई है। हालांकि व्हाट्सएप पर भेजी गई कथित मांगों की सूची और उसमें शामिल सभी बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
गौरतलब है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुछ नेताओं की नाराजगी और बंद कमरे में विधायकों की बैठक की खबरें भी सामने आई थीं। ऐसे में अब फारूक अब्दुल्ला को मांगों की सूची भेजे जाने की खबर ने पार्टी के अंदर चल रही राजनीतिक हलचल को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
कैबिनेट विस्तार के बाद विधायकों की बैठकें, मुबारक गुल की नाराजगी और ऑपरेशन लोटस के दावे ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं। क्या जम्मू-कश्मीर की सत्ता के गलियारों में कोई बड़ा सियासी तूफान दस्तक दे रहा है, क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस के अंदर सब कुछ ठीक है या फिर पार्टी के भीतर सुलग रही नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। जिन नेताओं ने मिलकर उमर अब्दुल्ला की सरकार बनाई क्या अब उन्हीं में से कुछ नेता पार्टी के फैसलों से खुश नहीं हैं। सबसे बड़ा सवाल क्या यह सिर्फ मंत्री पद न मिलने की नाराजगी है या नेशनल कॉन्फ्रेंस के अंदर किसी बड़े सियासी बदलाव की शुरुआत।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद जिस तरह एक के बाद एक घटनाक्रम सामने आ रहे हैं उन्होंने पार्टी की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी फिर विधायकों की बंद कमरे में बैठक, उसके बाद फारूक अब्दुल्ला को कथित तौर पर व्हाट्सएप पर मांगों की सूची भेजे जाने की खबर। अब मुबारक गुल की 4 नवंबर को बड़े खुलासे की घोषणा और इसी बीच ऑपरेशन लोटस का दावा। इन तमाम घटनाओं ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
एक तरफ नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता सब कुछ सामान्य होने का भरोसा दे रहे हैं तो दूसरी तरफ पार्टी के अंदर से सामने आ रही खबरें कुछ और ही कहानी बयान कर रही हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पर्दे के पीछे चल क्या रहा है।
बताया जा रहा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुछ विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को व्हाट्सएप के जरिए अपनी मांगों की सूची भेजी है। इनमें मुख्यमंत्री के सलाहकार को हटाने और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करवाने जैसी मांगें शामिल बताई जा रही हैं। हालांकि इन मांगों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। सवाल यह है कि अगर पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य है तो विधायकों को अपनी शिकायतें इस तरह नेतृत्व तक पहुंचाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
इसी बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष शोकत मीर ने विधायकों की बैठक को महज एक दोस्ताना मुलाकात बताया है। उनका कहना है कि कोई भी विधायक पार्टी के खिलाफ नहीं जा रहा और अंदरूनी गुटबाजी जैसी कोई बात नहीं है लेकिन राजनीति में केवल बयानों से सवाल खत्म नहीं होते असली कसौटी यह होगी कि नाराज बताए जा रहे नेताओं की शिकायतों का समाधान कैसे और कब होता है।
इस पूरे घटनाक्रम में वरिष्ठ नेता मुबारक गुल का मामला भी चर्चा का केंद्र बन गया है। मंत्री पद नहीं मिलने पर उनकी नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद उन्हें महासचिव बनाए जाने और फिर डॉ. फारूक अब्दुल्ला द्वारा उस पद से हटाकर अली मोहम्मद सागर को अगले आदेश तक जिम्मेदारी दिए जाने की खबर ने नई बहस शुरू कर दी है। अब मुबारक गुल ने 4 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा खुलासा करने की बात कही है। ऐसे में सभी की नजरें उनके अगले कदम पर टिकी हैं।
सियासी माहौल उस समय और गरमा गया जब आम आदमी पार्टी के नेता मेहराज मलिक ने जम्मू-कश्मीर में कथित तौर पर ऑपरेशन लोटस चलने का दावा कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर यहां तक कहा कि गुरेजी साहब अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। हालांकि यह फिलहाल उनका राजनीतिक दावा है जिसके समर्थन में कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए इसे किसी संभावित सत्ता परिवर्तन की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
वहीं सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने भी साफ किया है कि वह किसी तरह की राजनीतिक खरीद-फरोख्त के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अंदर जो कुछ हो रहा है उससे उनका नाम न जोड़ा जाए। रूहुल्लाह के मुताबिक उनकी लड़ाई उसूलों और जनता के अधिकारों की है। उनका यह बयान भी ऐसे समय आया है जब पार्टी के अंदर चल रही हलचल को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह केवल मंत्री पद और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर नाराजगी है या इसके पीछे पार्टी के भीतर फैसले लेने के तरीके को लेकर गहरी असहमति भी मौजूद है।------------
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

