home page

नेपाल जलप्रलयः 11 दिन बाद भी नहीं मिला मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा का सुराग, खत्म हो रही लौटने की उम्मीद

 | 
नेपाल जलप्रलयः 11 दिन बाद भी नहीं मिला मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा का सुराग, खत्म हो रही लौटने की उम्मीद


कोलकाता, 06 सितंबर (हि.स.)। नेपाल में आई बाढ़ के बाद लापता हुईं पूर्व रेलमंत्री मुकुल राय की बहू शर्मिष्ठा राय भौमिक का 11 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है। समय बीतने के साथ परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है और अब उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी है। कांचरापाड़ा स्थित राय परिवार के घर में हर दिन एक ही सवाल गूंज रहा है - शर्मिष्ठा कब लौटेंगी?

शर्मिष्ठा 21 अगस्त को 32 लोगों के एक दल के साथ नेपाल घूमने गई थीं। वहां पहुंचने के बाद वह लगातार पति, बच्चों और मां से फोन तथा वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में थीं। परिवार के मुताबिक, बाढ़ के बाद अचानक उनसे संपर्क टूट गया। इसके बाद से लगातार उनकी तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

शर्मिष्ठा के 10 वर्षीय बेटे को अब भी मां के लौटने का इंतजार है। वह बार-बार पिता और बड़ी बहन से पूछता है कि मां की कोई खबर मिली या नहीं। 16 वर्षीय बेटी खुद को संभालते हुए छोटे भाई को भी संभाल रही है, लेकिन मां के बारे में पूछे जाने पर वह भी भावुक हो जाती है।

मां के लापता होने के बाद दोनों बच्चों की जिम्मेदारी अब शुभ्रांशु राय और शर्मिष्ठा की मां संभाल रही हैं। बेटी के लापता होने की खबर मिलने के बाद शर्मिष्ठा की बुजुर्ग मां भी बेलघरिया स्थित अपना घर छोड़कर कांचरापाड़ा आ गई हैं। परिवार के करीबी लोग भी बच्चों की देखभाल में जुटे हैं।

राजनीतिक परिवार का हिस्सा होने के बावजूद शर्मिष्ठा खुद राजनीति की चकाचौंध से दूर रहना पसंद करती थीं। परिवार, बच्चों और अपने कामकाज में ही उनका अधिकांश समय बीतता था। दोनों बच्चों की पढ़ाई, स्कूल और अन्य गतिविधियों की जिम्मेदारी वह खुद संभालती थीं। परिवार के निजी स्कूल, पॉलीक्लिनिक और नेत्र जांच केंद्र से जुड़े कामकाज में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

मुकुल के बेटे शुभ्रांशु राय और शर्मिष्ठा की मुलाकात कल्याणी के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोस्ती आगे चलकर प्रेम में बदली और करीब 2009 में दोनों ने शादी कर ली। उनके दो बच्चे हैं, जो बैंडेल के एक निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ते हैं।

शर्मिष्ठा को घूमने का भी काफी शौक था। करीब डेढ़ साल पहले वह दोनों बच्चों के साथ लद्दाख घूमने गई थीं। नेपाल यात्रा के बाद भी उन्होंने बच्चों के साथ विदेश जाने की योजना बनाई थी। लेकिन नेपाल से लौटने से पहले ही उनका परिवार से संपर्क टूट गया।

अब 11 दिन बीत चुके हैं। घर में रोजमर्रा की गतिविधियां तो चल रही हैं, लेकिन शर्मिष्ठा की गैरमौजूदगी हर पल महसूस हो रही है। बच्चों की निगाहें मां के लौटने के इंतजार में हैं और परिवार अब भी किसी अच्छी खबर की उम्मीद लगाए बैठा है। मगर जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उस उम्मीद पर भी चिंता की परछाई गहराती जा रही है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर