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यति नरसिंहानंद ने महात्मा गांधी को लेकर दिया विवादित बयान, गोडसे को बताया बलिदानी

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यति नरसिंहानंद ने महात्मा गांधी को लेकर दिया विवादित बयान, गोडसे को बताया बलिदानी


यति नरसिंहानंद ने महात्मा गांधी को लेकर दिया विवादित बयान, गोडसे को बताया बलिदानी


ग्वालियर, 29 मार्च (हि.स.)। जूना अखाड़ा डासना के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ नरसिंहानंद ने विवादित बयान दिया है। वहीं, नाथूराम गोडसे को बलिदानी करार दिया है।

महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी रविवार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंचे थे। यहां उन्होंने हिन्दू महासभा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए महात्मा गांधी को समाज के लिए नुकसानदायक बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत का पहला अमूल्य बलिदान नाथूराम गोडसे का था, जो सनातन धर्म की रक्षा के लिए दिया गया।

यति नरसिंहानंद गिरी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उनके लिए यह सौभाग्य की बात है कि वे अपने सहयोगी जयवीर भारद्वाज के निमंत्रण पर गोडसे से जुड़े स्थल पर पहुंचे और वीर सावरकर की प्रतिमा को नमन किया। उन्होंने हिन्दू महासभा भवन आने को भी अपने लिए गौरवपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि अगर हम सावरकर के सिद्धांतों पर नहीं चलेंगे तो सनातन धर्म बहुत जल्दी विनष्ट हो जाएगा। अमर बलिदानी पंडित नाथूराम गोडसे वह व्यक्ति थे, जिन्होंने सावरकर के बताए हुए रास्ते पर चलकर जैसे हजारों बलिदानियों ने, हजारों क्रांतिकारीयों ने सावरकर की बातों को माना, उसी तरह वीर विनायक सावरकर की बात को अमर बलिदानी पंडित नाथूराम गोडसे ने भी माना और गांधी का वध किया।

महामंडलेश्वर ने कहा कि यह स्वतंत्र भारत का पहला अमूल्य बलिदान था, जो सनातन धर्म की रक्षा के लिए दिया गया। उनके अनुसार, नाथूराम गोडसे एक विचार पुंज हैं और यदि सनातन धर्म व हिंदू समाज उनका सही मूल्यांकन नहीं करेगा, उन्हें नहीं समझेगा, तो हिंदू समाज बहुत जल्दी विनष्ट हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि गांधी समाज के लिए जहर हैं। उनके मुताबिक, गांधी और उनके जैसे नेता अपने लोगों को दूसरों के लिए धोखा देते हैं, जबकि नाथूराम गोडसे उस नस्तर की तरह हैं, जिससे उस कैंसर और जहर का इलाज किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्मियों की ओर से अब तक नाथूराम गोडसे के साथ जो हुआ, उसके लिए वे उनसे क्षमा प्रार्थी हैं।

महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने सत्ताधारी दल भाजपा को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, कांग्रेस से भी अधिक जिम्मेदार है क्योंकि उसने सावरकर और गोडसे के विचारों से दूरी बनाकर गद्दारी की है। ग्वालियर में गोडसे का मंदिर बनाने से रोकने पर उन्होंने सरकार की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि जो लोग बलिदान से डरते हैं, वही इन विचारों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भाजपा ने सावरकर और गोडसे के विचारों से दूरी बनाकर उनके साथ ‘गद्दारी’ की है, जिसे उन्होंने अक्षम्य बताया।

पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर ने कहा कि हर सनातनी, हर जीवित हिंदू के घर में नाथूराम गोडसे की प्रतिमा होनी चाहिए। उनकी फोटो होनी चाहिए, उनकी तस्वीर होनी चाहिए। लेकिन सब कई बार तो विरोध हुआ है। विरोध तो गद्दार करते ही हैं। गांधीवाद देश और- धर्म को बर्बाद करने का नाम है। गांधीवाद हिंदू समाज से विश्वासघात का नाम है। लेकिन गांधीवाद से नेताओं को खुलकर अय्याशी करने का मौका और अपनी अय्याशी को छुपाने का मौका मिलता है। अगर आप वीर सावरकर और नाथूराम गोडसे के विचारों को अपनाएंगे तो आपको आत्मबलिदान देना पड़ेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर