भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों ने मप्र के विदिशा में शैक्षणिक, औद्योगिक एवं ऐतिहासिक विरासत को जाना
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही छात्राओं से किया संवाद, कृषि आधारित उद्योग की संभावनाओं को समझा
भोपाल, 19 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी अभिषेक दुबे (डीआरएसएम, ईआईआई, बर्लिन, जर्मनी) तथा शुचिता किशोर (काउंसल जनरल, फ्रैंकफर्ट) ने सोमवार को मध्य प्रदेश के विदिशा जिले का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने जिले में संचालित विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन कर यहां की शैक्षणिक पहल, कृषि आधारित औद्योगिक गतिविधियों तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत की जानकारी प्राप्त की।
विदेश सेवा के अधिकारियों ने जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित सशक्त वाहिनी कोचिंग कक्षाओं का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही छात्राओं से संवाद कर उनकी तैयारियों, अध्ययन की रणनीति तथा भविष्य की आकांक्षाओं के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों ने छात्राओं से विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए निरंतर अध्ययन, आत्मविश्वास एवं लक्ष्य के प्रति समर्पण को महत्वपूर्ण बताया। छात्राओं ने भी अधिकारियों से संवाद करते हुए अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं।
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने कृषि आधारित उद्योग का भी अवलोकन किया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर कृषि उपज पर आधारित औद्योगिक गतिविधियों, उत्पादन प्रक्रिया तथा जिले में कृषि आधारित उद्यमों के विकास की संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर स्थानीय कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग, मूल्य संवर्धन तथा कृषि से जुड़े उद्यमों के माध्यम से रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाओं को भी जाना।
इसके साथ ही भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों ने विदिशा की ऐतिहासिक धरोहर उदयगिरि गुफाओं का भ्रमण किया। उन्होंने यहां स्थित प्राचीन गुफाओं, शिल्पकला एवं ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। उदयगिरि की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देखकर अधिकारियों ने विदिशा की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक पहचान को जाना।
विदिशा भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने जिले में शिक्षा, कृषि एवं उद्योग के क्षेत्र में संचालित गतिविधियों के साथ-साथ जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का भी अवलोकन किया। यह भ्रमण विदिशा की विविध संभावनाओं—शिक्षा, कृषि आधारित उद्यम, पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत—से परिचित होने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

