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इसी सत्र में कानून का रूप लेगा समान नागरिक संहिता विधेयक, इससे सभी का होगा भला: मुख्यमंत्री डॉ यादव

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इसी सत्र में कानून का रूप लेगा समान नागरिक संहिता विधेयक, इससे सभी का होगा भला: मुख्यमंत्री डॉ यादव


भोपाल, 20 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की धरती पर राम, रहीम, रविन्दर और रॉबिन सभी के लिए एक कानून की बात कही जा रही है। इस संबंध में विधानसभा के पटल पर समान नागरिक संहिता विधेयक प्रस्तुत हुआ है, जो इसी (वर्षाकालीन) सत्र में कानून का रूप लेगा। समान नागरिक संहिता से सभी का भला सुनिश्चित होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को विधानसभा में मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने इसे 19 जुलाई को स्वीकृति दी थी। उम्मीद है, भविष्य में इसके लाभ से सभी को लाभान्वित किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का लाभ सभी नागरिकों को प्राप्त होगा। सर्वाधिक लाभ मुस्लिम बहनों को होने वाला है। एक राष्ट्र, एक प्रधान, एक विधान और एक व्यवस्था के सिद्धांत पर कार्य हो रहा है। विवाह विच्छेद के बिना दूसरा विवाह नहीं किया जा सकेगा। इस संबंध में प्रदेश में उच्च स्तरीय समिति के गठन और पूरे प्रदेश में विचार- विमर्श करने के साथ ही सभी समुदायों के नागरिकों से सुझाव प्राप्त किए गए। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं का समर्थन मिला था। प्रदेश की बेहतरी के लिए विपक्ष सहित सभी वर्गों और पक्षों से सहयोग और एकजुटता की आशा की गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदशन में मध्य प्रदेश एक नया रिकार्ड बनाने जा रहा है। अलग-अलग धर्मों के अनुयायियों के लिए एक विवाह का कानून लागू होगा। वैधानिक रूप से तलाक लिए बिना दूसरा विवाह गैर कानूनी रहेगा। इसके लिए दंड का कानून भी रहेगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात ही इसकी आवश्यकता थी। अब जब मध्य प्रदेश में यह कानून लागू होने वाला है तो निश्चित ही ऐसे अवसर पर समस्त प्रदेशवासी बधाई के पात्र हैं।

गौरतलब है कि सोमवार से शुरू हुए मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पहले ही दिन राज्य सरकार ने सदन में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) विधेयक-2026 पेश कर दिया। इसके साथ ही सरकार ने 13 अन्य विधेयक भी सदन में एक के बाद एक लगातार पेश कर दिए।

इस प्रकार एक ही दिन में सरकार ने कुल 14 विधेयक सदन में प्रस्तुत किए। ये विधेयक हैं-

- मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026

- मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक, 2026

- मध्य प्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026

- मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक-2026

- मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026

- मध्य प्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026

- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, विधेयक, 2026

- मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक-2026

- मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक-2026

- मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज(संशोधन) विधेयक-2026

- मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026

- मध्य प्रदेश वेट (संशोधन)विधेयक, 2026

- मध्य प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026

- मध्य प्रदेश निरसन विधेयक-2026

विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश होने के बाद इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि विधेयक को पहले सदन के पटल पर रखा गया और बाद में अनुपूरक कार्यसूची में शामिल किया गया। वहीं, भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की और शाहबानो प्रकरण का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने वोट बैंक की राजनीति के लिए कई फैसले किए।

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि देश में जनसंख्या संतुलन का मुद्दा गंभीर है और इसी वजह से समान नागरिक संहिता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में बहुविवाह और हलाला जैसी प्रथाओं को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। उन्होंने यूसीसी का विरोध कर रहे लोगों से भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था लागू करना है।

इधर, यूसीसी विधेयक को लेकर भोपाल के शहरकाजी सैयद मुश्ताक अली नदवी विधानसभा पहुंचे। उन्होंने विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील के साथ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील भी उनके साथ मौजूद रहे। शहर काजी ने कहा कि यदि आदिवासी समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है, तो मुस्लिम समुदाय को भी इससे बाहर रखा जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में अपना पक्ष विधानसभा अध्यक्ष के सामने रखा। अब यूसीसी विधेयक पर मंगलवार को विधानसभा में विस्तृत चर्चा होगी। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।

यूसीसी में संशोधन की मांग का प्रस्ताव

मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए यूसीसी विधेयक-2026 को लेकर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने संशोधन का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने मांग की है कि जिन समुदायों के परंपरागत अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 और अनुच्छेद 29 के तहत संरक्षित हैं, उन पर यूसीसी के प्रावधान लागू नहीं किए जाएं। आरिफ मसूद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 नागरिकों को अपने धर्म का पालन, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है, जबकि अनुच्छेद 29 सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा करता है। ऐसे में इन संवैधानिक प्रावधानों के तहत संरक्षित परंपरागत अधिकारों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

वहीं, कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा कि बाबासाहेब और संविधान ने हम सभी को आजादी दी है। चूंकि वह आजादी मौजूद है, इसलिए जिस तरह एसटी समुदाय को यूसीसी से छूट दी गई थी, उसी तरह मुसलमानों को भी छूट मिलनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर