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उज्जैन में सावन के अंतिम सोमवार धूमधाम से निकली महाकाल सवारी, चार स्वरूपों में भक्तों को दिए दर्शन

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उज्जैन में सावन के अंतिम सोमवार धूमधाम से निकली महाकाल सवारी, चार स्वरूपों में भक्तों को दिए दर्शन


उज्जैन में सावन के अंतिम सोमवार धूमधाम से निकली महाकाल सवारी, चार स्वरूपों में भक्तों को दिए दर्शन


उज्जैन, 24 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्रावण माह के चतुर्थ व अंतिम सोमवार को विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की सावन मास की चौथी सवारी धूमधाम से निकाली गई। पालकी में सवार होकर राजाधिराज अवंतिकानथ लाव-लश्कर के साथ अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। इस अवसर पर बाबा महाकाल ने अपने भक्तों को एक साथ चार दिव्य स्वरूपों में दर्शन दिए। भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूपों के दर्शन के लिए करीब 7.50 लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे।

महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडल में पूजन-अर्चन के बाद सोमवार शाम चार बजे भगवान महाकाल चांदी की पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण के लिए रवाना हुए। सवारी के निकलते ही श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव और बाबा महाकाल के जयकारे लगाए। ढोल-नगाड़ों और भक्तों की आस्था से पूरा उज्जैन शिवमय नजर आया। जगह-जगह बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती हुई नज़र आई। भगवान महाकाल ने पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, गजराज पर श्री मनमहेश, बैलगाड़ी में गरुड़ पर श्री शिवतांडव और बैलगाड़ी में नंदी पर श्री उमा-महेश के स्वरूप में विराजमान होकर नगर का भ्रमण किया।

सवारी निकलने से पूर्व दोपहर 3.30 बजे मंदिर के सभामंडप में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन किया। इस दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा और मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इसके बाद सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। जैसे ही सवारी मंदिर के मुख्य द्वारा पर पहुंची, सशस्त्र पुलिस बल के जवानों और महाकाल मंदिर बैंड ने भगवान चंद्रमौलेश्वर को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी।

इसके बाद महाकाल मंदिर से शुरू होकर सवारी गुदरी चौराहा होते हुए क्षिप्रा तट रामघाट पहुंची। रामघाट पर मां क्षिप्रा के पवित्र जल से भगवान का पूजन और अभिषेक किया गया। इसके बाद सवारी कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, ढाबा रोड, छत्री चौक और गोपाल मंदिर पहुंची, जहां सिंधिया ट्रस्ट की ओर से भगवान का स्वागत व पूजन हुआ।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार इस सवारी को पर्यावरण संरक्षण की थीम पर निकाला गया। मंदिर समिति द्वारा चलाए गए विशेष संदेश रथ और झांकी के माध्यम से श्रद्धालुओं को वृक्षारोपण, स्वच्छता और मां क्षिप्रा की निर्मलता बनाए रखने का संदेश दिया गया। बाबा महाकाल की अगली (पंचम) सवारी 31 अगस्त 2026 को निकलेगी, जिसमें भगवान पांच स्वरूपों (होल्कर स्टेट के मुखारविंद सहित) में भक्तों को दर्शन देंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर