मध्य प्रदेश में सुगम परिवहन सेवा में पुरानी बसों का नया कलेवर, उठे सवाल
भोपाल, 26 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की वापसी शुरू हुई, लेकिन मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के पहले ही दिन बसों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 सितंबर को भोपाल के भेल दशहरा मैदान से 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर सेवा की शुरुआत की। इनमें 180 नई इलेक्ट्रिक बसें हैं, जबकि 171 बसें पहले से शहरों में सिटी बस सेवा के रूप में संचालित हो रही हैं। इन पुरानी बसों को नए रंग-रूप में शामिल किए जाने को लेकर अब कांग्रेस भी सवाल कर रही है।
सुगम परिवहन सेवा के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन किया जाना है। सेवा में शामिल 180 इलेक्ट्रिक बसों को आधुनिक सुविधाओं से लैस और वातानुकूलित बताया गया है। इसके साथ ही अलग-अलग शहरों में पहले से चल रही 171 सिटी बसों को भी नई व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।
पुरानी बसों पर चढ़ा नया रंग
भोपाल में सुगम परिवहन सेवा में शामिल 171 बसें पहले से ही सिटी बस सेवा के तहत चल रही थीं। ये बसें भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के अंतर्गत संचालित होती थीं और इनका रंग लाल था। नई व्यवस्था में बसों का संचालन एमपी यात्री परिवहन कंपनी के अधीन किए जाने के बाद इन्हें एकरूपता देने के लिए ऑरेंज रंग और रेडियम लगाया गया।
यही बदलाव अब चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह है कि केवल रंग और बाहरी कलेवर बदलने से क्या पुरानी बसों की स्थिति भी बदल गई? कांग्रेस ने इसको लेकर सोशल मीडिया पर सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि ‘खाटाला बसों को नितिन गडकरी और मोहन बाबू ने हरी झंडी दिखाई। वाह रे सुगम परिवहन।’
कांग्रेस की ओर से बस की बॉडी पर लगाए गए रेडियम के उखड़ने का वीडियो भी जारी किया गया है। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला ने पुरानी बसों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं अभिनव बारोलिया ने बसों की रंगाई-पुताई और रेडियम के काम को लेकर टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
सुगम परिवहन सेवा में शामिल पुरानी डीजल बसों को लेकर सबसे बड़ा सवाल उनकी उम्र और रखरखाव को लेकर है। बताया जा रहा है कि अधिकांश डीजल बसें करीब सात से आठ साल पुरानी हैं। भोपाल में इन बसों के खराब होने, धुआं निकलने और बीच सड़क पर खड़े होने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
बसों के भीतर की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ बसों में सीटें उखड़ी हुई हैं तो कहीं यात्रियों के लिए लगाए गए हैंडल तक टूटे हुए बताए जा रहे हैं। सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों और पैनिक बटन के काम नहीं करने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में बाहर से रंगी हुई बसों और भीतर की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू करने के पीछे अलग-अलग एजेंसियों के अधीन चल रही बस सेवाओं को एक व्यवस्था में लाने की कवायद भी बताई जा रही है। भोपाल में पहले भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड और पीएम बस सेवा के माध्यम से बसों का संचालन होता था। इसी तरह अन्य शहरों में भी अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत सिटी बसें संचालित हो रही थीं।
अब नई व्यवस्था में पुरानी बसों को एमपी यात्री परिवहन कंपनी के अधीन लाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक इसका उद्देश्य बस संचालन में एकरूपता लाना है। स्मार्ट सिटी सीईओ अंजू अरुण कुमार का कहना है कि बसों को एकरूपता देने के लिए संबंधित कंपनी ने ही उन पर रंग किया है। उनकी सर्विसिंग के बाद ही उन्हें चलाया जाएगा वहीं, नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने भी बताया कि बसें एमपी यात्री परिवहन कंपनी के अधीन हो गई हैं।
21 साल बाद लौटी सरकारी बस सेवा
मध्य प्रदेश में सरकारी बस सेवा की वापसी भी इस शुरुआत को महत्वपूर्ण बनाती है। करीब 21 साल बाद राज्य में सरकारी स्तर पर बस सेवा फिर शुरू हुई है। लंबे अंतराल के बाद शुरू हुई इस सेवा से प्रदेश के सात शहरों के बीच और शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल 351 बसों के साथ शुरू हुई इस सेवा में 180 नई इलेक्ट्रिक बसें और 171 पुरानी सिटी बसें शामिल हैं। नई व्यवस्था के तहत पुरानी बसों को नया रंग जरूर मिल गया है, लेकिन यात्रियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि सड़क पर उनका सफर वास्तव में कितना सुगम और सुरक्षित बनता है।
हम जो कहते हैं,करके भी दिखाते हैं: मुख्यमंत्री
इधर, सुगम परिवहन सेवा को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को एक्स पर कहा कि हम जो कहते हैं, वो करके भी दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' एवं 'पीएम ई-बस सेवा' के जरिए हमने अनंत चतुर्दशी के मंगल अवसर पर प्रदेशवासियों को खुशियों की अनंत सौगात दी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले दो दशकों में शासकीय बसों का संचालन बंद होने के कारण हमारे ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक परिवहन का बड़ा अभाव बना हुआ था। दूर-दराज के कई गांव मुख्य सड़कों से कट गए थे। गांव-देहात के हमारे गरीबों, किसानों एवं छात्र-छात्राओं को आने-जाने के लिए सीमित साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। उन्होंने कहा कि हमने अपने 'संकल्प पत्र' में भी यह सेवा प्रारंभ करने का उल्लेख किया था। गत दिवस शुक्रवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ इस सेवा का मंगल आरम्भ करते हुए संकल्प को धरातल पर साकार कर दिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि शुक्रवार को राज्यभर में 1,500 बसों से शुरू हुई इस सेवा को हमने वर्ष 2029 तक 15,000 बसों तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, ताकि प्रदेश के हर व्यक्ति तक सुगम बस परिवहन की सुविधा पहुंच सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

