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सिंधिया राजघराने की 41 हजार करोड़ की संपत्ति का मामला फिर उलझा, प्रतिमा राणा के उपस्थित नहीं होने से टली सुनवाई

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सिंधिया राजघराने की 41 हजार करोड़ की संपत्ति का मामला फिर उलझा, प्रतिमा राणा के उपस्थित नहीं होने से टली सुनवाई


ग्वालियर, 04 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के ऐतिहासिक सिंधिया राजघराने की करीब 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति का पारिवारिक विवाद एक बार फिर कानूनी उलझनों में फंस गया है। जिस समझौता प्रस्ताव (राजीनामे) के आधार पर मामले के निपटारे की उम्मीद जताई जा रही थी, अब उसी समझौते को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायालय (एडीजे) में बुधवार को इस हाई-प्रोफाइल केस की अहम सुनवाई थी। सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ (दिवंगत पद्मावती राजे) की बेटी प्रतिमा राणा के बयान दर्ज होने थे, लेकिन वे कोर्ट नहीं पहुंचीं। इसलिए एक बार फिर सुनवाई टल गई है।

दरअसल, प्रतिमा राणा का आरोप है कि उनसे धोखाधड़ी करके समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और अपनी तीनों मौसियों वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे पर कथित तौर पर धोखे से दस्तखत कराने का आरोप लगाया है। अदालत ने उनकी आपत्ति स्वीकार करते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का मौका दिया है।

वहीं, दूसरी तरफ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने अदालत में जवाब दाखिल कर इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि समझौते पर सभी की सहमति से हस्ताक्षर किए गए थे। उनके पक्ष की ओर से यह भी दलील दी गई कि हस्ताक्षर के बाद परिवार के सदस्य साथ रुके, पारिवारिक डिनर हुआ और तस्वीरें भी खिंचवाई गई थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष ने भी समझौते को पूरी सहमति से हुआ बताया है।

गौरतलब है कि वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा मांगते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर किया था। इस मामले में दिवंगत पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी और प्रतिमा देवी को भी पक्षकार बनाया गया था। हालांकि, अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण उन्हें एकपक्षीय यानी एक्स पार्टी घोषित कर दिया गया था।अब प्रतिमा राणा ने अदालत में आवेदन देकर दोबारा मुकदमे की प्रक्रिया में शामिल होने की मांग की है। उनका तर्क है कि उनकी मां पद्मावती राजे भी पैतृक संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनकी बेटियों की सहमति और अधिकारों को नजरअंदाज कर किया गया समझौता कानूनी सवाल खड़े करता है।

इस पूरे विवाद में 78 साल पुराना ऐतिहासिक विलय पत्र 'द कोवेनेंट' भी महत्वपूर्ण दस्तावेज बनकर सामने आया है। इसकी दिल्ली के नोटरी से प्रमाणित प्रति अदालत में पेश की जा चुकी है। इस दस्तावेज में मध्य भारत की रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और पूर्व राजाओं को मिलने वाले प्रिवी पर्स यानी वार्षिक भत्ते से जुड़ी जानकारियां दर्ज हैं।फिलहाल प्रतिमा राणा की आपत्ति और उनके आरोपों ने 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के विवाद को नया मोड़ दे दिया है। अब अदालत में उनके बयान, पेश किए जाने वाले सबूत और ऐतिहासिक दस्तावेज इस मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर