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मप्र से राज्यसभा के लिए निर्दलीय राजकुमार लोहानी ने ठोकी ताल, कांग्रेस का समर्थन

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मप्र से राज्यसभा के लिए निर्दलीय राजकुमार लोहानी ने ठोकी ताल, कांग्रेस का समर्थन


भोपाल, 02 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश से राज्यसभा की रिक्त सीट के लिए होने वाला उपचुनाव अब दिलचस्प हो गया है। भाजपा के उम्मीदवार केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुकाबले निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी ने सोमवार को विधानसभा पहुंचकर नामांकन दाखिल किया।

कांग्रेस ने राजकुमार लोहानी को समर्थन देने का फैसला किया है। उनके नामांकन में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे प्रस्तावक बने। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ अकील, अभिजीत शाह, सुरेंद्र सिंह हनी बघेल सहित पार्टी के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

राजकुमार लोहानी के मैदान में उतरने से राज्यसभा उपचुनाव में मुकाबले की स्थिति बन गई है। हालांकि, विधानसभा में संख्या बल के लिहाज से भाजपा की स्थिति काफी मजबूत है। इसके बावजूद कांग्रेस ने लोहानी को समर्थन देकर भाजपा उम्मीदवार के सामने चुनौती पेश करने का राजनीतिक फैसला लिया है।

उपनेता प्रतिपक्ष कटारे ने कहा कि नामांकन दाखिल करने की सोमवार को अंतिम तारीख थी। राजकुमार लोहानी ने चुनाव में कांग्रेस विधायकों से सहयोग मांगा है। सभी कांग्रेस विधायकों ने उन्हें पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया है। हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का संवैधानिक अधिकार है। कटारे ने कहा कि राज्यसभा का उम्मीदवार प्रदेश का स्थानीय व्यक्ति होना चाहिए। मध्य प्रदेश में योग्य लोगों की कमी नहीं है, ऐसे में बाहर के प्रत्याशी को क्यों थोपा जाए।

भाजपा की ओर से पुरी पहले ही भर चुके हैं पर्चा

भाजपा ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया है। पुरी ने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था। यह उपचुनाव केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के राज्यसभा से इस्तीफा देने के कारण कराया जा रहा है। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था।

12 नवंबर को मतदान

निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार, तीन नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवार पांच नवंबर तक नाम वापस ले सकेंगे। जरूरत पड़ने पर 12 नवंबर को सुबह नौ से शाम चार बजे तक मतदान होगा। इसके बाद शाम पांच बजे मतगणना की जाएगी। मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 65 विधायक हैं। एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है। ऐसे में संख्या बल भाजपा के पक्ष में है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर