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(अपडेट) मप्र के बालाघाट में मृत बच्चों के परिवारों से मिले राहुल गांधी, बोले- आदिवासी देश के मालिक, इन्हें हक मिले

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(अपडेट) मप्र के बालाघाट में मृत बच्चों के परिवारों से मिले राहुल गांधी, बोले- आदिवासी देश के मालिक, इन्हें हक मिले


(अपडेट) मप्र के बालाघाट में मृत बच्चों के परिवारों से मिले राहुल गांधी, बोले- आदिवासी देश के मालिक, इन्हें हक मिले


(अपडेट) मप्र के बालाघाट में मृत बच्चों के परिवारों से मिले राहुल गांधी, बोले- आदिवासी देश के मालिक, इन्हें हक मिले


(अपडेट) मप्र के बालाघाट में मृत बच्चों के परिवारों से मिले राहुल गांधी, बोले- आदिवासी देश के मालिक, इन्हें हक मिले


बालाघाट, 01 अक्टूबर (हि.स.)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक के जगला गांव पहुंचकर उन बैगा आदिवासियों से मुलाकात की, जिनके बच्चे बीमारी से जान गंवा चुके हैं। करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं, उन्हें उनका हक मिलना चाहिए, लेकिन एमपी में ऐसा नहीं हो रहा है।

राहुल गांधी ने बालाघाट के जगला गांव में बैगा परिवारों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यहां बहुत सारे बच्चों की मौत हुई है। कुपोषण और बीमारी के कारण मौत हुई है। इसका समय पर इलाज न मिलना सरकार का फेलियर है। सरकार ने कोई सपोर्ट नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि आधे से ज्यादा लोगों को मुआवजा तक नहीं दिया गया। मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि वह अपनी जिम्मेदारी पूरी करे।

उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों को उनका वन अधिकार पट्टा मिलना चाहिए। मनरेगा के तहत उन्हें रोजगार और बच्चों को शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। सरकार कहती है कि 24 घंटे विकास हो रहा है, लेकिन 24 घंटे भ्रष्टाचार हो रहा है। लेकिन जब हमारे आदिवासी भाइयों को मदद की जरूरत है, तब उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा है। केंद्र और राज्य की सरकार ने बेसहारा छोड़ दिया है। बीमारी से निपटने में राज्य सरकार पूरी तरह फेल रही। वे यह मुद्दा लोकसभा में उठाएंगे।

राहुल गांधी ने कहा कि एक और बात है। अगर किसी महिला को एक सरकारी योजना के तहत आर्थिक सहायता मिलती है, तो लाड़ली बहना योजना का पैसा काट लिया जाता है। अगर सरकार दो योजनाएं चला रही है, तो लोगों को दोनों योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। हमारी सरकार आने पर आदिवासी समुदाय की हरसंभव मदद की जाएगी। वन अधिकार कानून के तहत उन्हें उनका अधिकार दिलाया जाएगा और शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। हम उन्हें वनवासी नहीं, बल्कि आदिवासी कहते हैं। वे इस देश के मूल निवासी हैं। इसलिए उन्हें देश में उनका उचित स्थान, अधिकार और शिक्षा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है, जैसे आदिवासियों को भारत के बीचों-बीच अकेला छोड़ दिया गया हो, मानो उनके लिए न तो केंद्र सरकार है और न ही मध्य प्रदेश सरकार। मनरेगा ठप है, वन अधिकार कानून लागू नहीं हो रहा और आदिवासियों को जमीन के पट्टे नहीं मिल रहे हैं। बच्चों की मौत के बावजूद पीड़ित परिवारों को पूरा मुआवजा तक नहीं मिला है। आधे लोग अब भी इससे वंचित हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि मैं विपक्ष की तरफ से, कांग्रेस पार्टी की ओर से कहना चाहता हूं कि आप अपना काम कीजिए। शिक्षा दीजिए, अस्पताल दीजिए, इनका जो हक वो दीजिए। हमने तो उनसे कहा है कि जैसे ही हमारे सरकार आएगी, हम इनकी मदद करेंगे। हम बिल लाएंगे। हम इनकी शिक्षा में विश्वास करते हैं। हम इन्हें वनवासी नहीं कहते हैं। हम इन्हें आदिवासी कहते हैं। शिक्षा मिलना चाहिए, स्वास्थ्य सेवा मिलना चाहिए, इन्हें इनका हक मिलना चाहिए। लोकसभा में मामला उठाऊंगा। सिर्फ इनका नहीं, पूरे देश के आदिवासियों का मुद्दा उठाऊंगा।

इधर, मप्र कांग्रेस ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी साझा करते हुए नेता विपक्ष राहुल गांधी आज बालाघाट के जगला गांव में आदिवासी परिवारों के बीच पहुंचे हैं। पिछले कुछ समय में यहां आदिवासी परिवारों के 30 से ज्यादा बच्चों ने कुपोषण और मलेरिया-मीजल्स जैसी बीमारियों के कारण दम तोड़ दिया। राहुल गांधी ने यहां पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हिम्मत दी और उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाने का वादा किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर