उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविन्द्र पुरी के साथ अभद्रता
- चांदी गेट से प्रवेश को लेकर हुई खींचतान, मंदिर की व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल
भोपाल, 05 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महामंडलेश्वर रविंद्र पुरी महाराज को दर्शन के दौरान असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। मोबाइल जांच के नाम पर मंदिर के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें चांदी गेट से प्रवेश देने में आनाकानी की। काफी देर तक इंतजार कराने और कथित अभद्र व्यवहार से नाराज रविंद्र पुरी महाराज ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से करने की बात कही है।
दरअसल, नासिक कुंभ मेले का ध्वज फहराने के बाद बुधवार को रविंद्र पुरी महाराज उज्जैन पहुंचे थे। यहां वे गुरुवार शाम करीब चार बजे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। उनके लिए निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत चांदी गेट से प्रवेश और देहरी से दर्शन की व्यवस्था थी। उनके साथ कुछ अनुयायी भी थे, लेकिन प्रवेश के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों ने मोबाइल जांच का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। समझाने के बावजूद प्रवेश को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई और उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
इस व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि जब मंदिर में साधु-संतों के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है तो आम श्रद्धालुओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के कुछ कर्मचारी आए दिन संतों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। संबंधित कर्मचारी का नाम भी अधिकारियों को बताया गया है। उन्होंने ऐसे कर्मचारियों को तत्काल हटाने की मांग की।
रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि मंदिर में दर्शन व्यवस्था को कुछ लोगों ने अपना धंधा बना लिया है। कर्मचारियों को मनमानी की छूट मिलने से व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाने के साथ दिल्ली में भी शिकायत करेंगे।
कुंभ से पहले व्यवस्थाओं पर सवाल
रविंद्र पुरी महाराज ने आगामी कुंभ मेले के मद्देनजर मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में यदि संतों और भक्तों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं होती हैं तो विवाद की स्थिति बन सकती है और इससे मंदिर की छवि प्रभावित होगी।
प्रोटोकॉल के बावजूद अधिकारी नहीं पहुंचे
घटना के दौरान मंदिर प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। मंदिर में प्रशासक के रूप में आईएएस अधिकारी, डिप्टी कलेक्टर और जनसंपर्क अधिकारी की जिम्मेदारी संभालने वाले तहसीलदार स्तर के अधिकारी तैनात हैं। इसके बावजूद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के आगमन पर प्रोटोकॉल के अनुरूप अधिकारी की मौजूदगी नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।
इस बीच विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी भी मंदिर में मौजूद थे। घटना की जानकारी मिलने पर वे रविंद्र पुरी महाराज से मिलने पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली और फोन पर मंदिर प्रशासक से चर्चा कर व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

