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(लीड) मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता ज्वाला ने दिया पांच शावकों को जन्म

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(लीड) मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता ज्वाला ने दिया पांच शावकों को जन्म


(लीड) मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता ज्वाला ने दिया पांच शावकों को जन्म


श्योपुर, 09 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबियाई मादा चीता 'ज्वाला' ने सोमवार को पांच शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही अब भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को सोशल मीडिया पर इस जानकारी को साझा करते हुए इसे 'प्रोजेक्ट चीता' और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि कूनो में आने के बाद ज्वाला ने यहां के वातावरण को पूरी तरह अपना लिया है और वह पार्क की सबसे सफल मादा चीताओं में शुमार हो गई है।

वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया एक्स एक संदेश में कहा कि प्रोजेक्ट चीता के लिए गर्व का क्षण है कि नामीबियाई चीता और तीसरी बार मां बनी ज्वाला ने आज कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पांच शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ भारत में जन्मे स्वस्थ शावकों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है, जो भारतीय धरती पर चीता के 10वें सफल शावक समूह (लिटर) का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह भारत की चीता संरक्षण यात्रा में एक और अहम उपलब्धि है। यह सफलता उन पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ और सभी संबंधित लोगों के समर्पण, कौशल और निरंतर मेहनत का परिणाम है, जो इस अभियान को धरातल पर सफल बनाने में जुटे हैं। इन नए शावकों के आगमन के साथ भारत में चीतों की संख्या अब 53 हो गई है। वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक और हृदयस्पर्शी क्षण है। कामना है कि ज्वाला और उसके शावक स्वस्थ रहें और भारत की चीता कहानी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।

मादा चीता ज्वाला मूल रूप से अफ्रीकी देश नामीबिया से लाई गई थी। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने जन्मदिन के अवसर पर कूनो में छोड़े गए आठ नामीबियाई चीतों में ज्वाला भी शामिल थी। उस समय उसका नाम सियाया था, जिसे बाद में ज्वाला नाम दिया गया। कूनो आने के बाद ज्वाला ने यहां शानदार ढंग से खुद को ढाला और अब वह कूनो की सबसे सफल मादा चीताओं में मानी जाती है।

ज्वाला ने पहली बार मार्च 2023 में चार शावकों को जन्म दिया था, हालांकि उनमें से केवल एक शावक जीवित बच पाया। इसके बाद जनवरी 2024 में उसने दूसरी बार तीन शावकों को जन्म दिया। अब तीसरी बार उसने पांच शावकों को जन्म देकर कूनो में चीतों की आबादी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ज्वाला और उसके पांचों नवजात शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। विशेषज्ञों की टीम सीसीटीवी और मैदानी निगरानी के जरिए शावकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर नजर रख रही है। वन अधिकारियों के अनुसार इस बार ज्वाला की मेटिंग कूनो के खुले जंगल में प्राकृतिक रूप से हुई थी, जो इस बात का संकेत है कि चीते अब कूनो के वातावरण में पूरी तरह अनुकूल हो चुके हैं।

ज्वाला के शावकों से जुड़ा एक खास किस्सा भी चर्चित है। वर्ष 2023 में जन्मे उसके शावकों में से एक शावक मुखी बेहद कमजोर था, लेकिन वन विभाग की देखरेख में वह जीवित बच गई और आज वह कूनो की पहचान बन चुका है। कूनो में चीतों का लगातार सफल प्रजनन इस परियोजना के भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

मादा चीता ज्वाला के पांच शावकों को जन्म देने के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है। इनमें से 50 चीते कूनो नेशनल पार्क में और तीन चीते गांधी सागर अभयारण्य में हैं। इनमें 25 चीते नामीबियाई मूल के हैं, जिनमें से 22 का जन्म भारत में हुआ है। वहीं, 19 चीते दक्षिण अफ्रीकी मूल के हैं और इनमें से 11 का जन्म भारत में हुआ है। इस तरह भारत में जन्मे जीवित चीतों की संख्या 33 हो गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर