मध्य प्रदेश में धूमधाम से मनाया गया करवा चौथ का पर्व, कई जिलों में नहीं दिखा चांद
- भोपाल में केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने साधना सिंह के साथ की पूजा-अर्चना
भोपाल, 29 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में सुहागिनों का प्रमुख पर्व करवा चौथ गुरुवार को उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही सुहागिन महिलाओं ने निर्जला उपवास किया और रात में चंद्रमा के दर्शन कर पूजन किया। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर अपना व्रत खोला। प्रदेश के कई शहरों में गुरुवार को सुबह से पानी बरसता रहा और बादलों के चलते देर रात तक चांद के दर्शन नहीं हो पाए।
भोपाल में रात 8:58 बजे चांद दिखा। इस दौरान महिलाओं ने चांद का पूजन अर्चन किया। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भोपाल स्थित निवास पर अपनी धर्मपत्नी साधना सिंह के साथ चंद्रमा का पूजन किया। उन्होंने इसकी जानकारी सोशल मीडिया एक्स पर साझा, साथ ही वीडियो भी शेयर किया।
केन्द्रीय मंत्री चौहान ने पोस्ट किया कि करवा चौथ प्रेम, विश्वास और समर्पण का पर्व है। आज जीवन संगिनी साधना जी के साथ पूजा-अर्चना की और उन्हें जल ग्रहण करवाकर व्रत पूर्ण कराया। हमारे देश की माताएँ, बहनें और बेटियाँ अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु के लिए जिस श्रद्धा, प्रेम तथा तपस्या से यह व्रत रखती हैं, वह सचमुच अतुलनीय है। भारतीय नारी का यही त्याग और स्नेह परिवार को जोड़कर रखता है। करवा माँ से प्रार्थना है कि सभी माताओं-बहनों को अखण्ड सौभाग्य का आशीर्वाद मिले। हर घर में प्रेम, विश्वास और खुशियों का उजाला बना रहे।
इधर, इंदौर और उज्जैन में भी बादलों के बीच देर रात चांद नजर आया। वहीं, पीथमपुर और मुलताई में भी महिलाओं ने चांद देखकर व्रत खोला, जबकि ग्वालियर, बालाघाट और मैहर में चांद नजर नहीं आया, लेकिन महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर व्रत खोल लिया। ग्वालियर में हल्की बारिश हुई, जबकि बालाघाट और मैहर में आसमान में बादल छाए रहे। रतलाम में महिलाएं ब्रिज पर चढ़कर चांद का इंतजार कर रही थीं। आष्टा में काफी इंतजार के बाद बादल छंटे और रात 10:50 बजे चांद नजर आया। चांद के दीदार होते ही महिलाओं ने पूजन किया और व्रत खोला।
वहीं, उज्जैन केंद्रीय जेल में 21 महिला बंदियों ने भी पतियों के साथ करवा चौथ मनाया। जेल प्रशासन ने उनकी मुलाकात कराई, जिसके बाद महिलाओं ने पतियों का पूजन कर उनके हाथ से पानी पीकर व्रत खोला।
बैतूल के बालाजीपुरम में 500 से अधिक जोड़ों ने एक साथ किया पूजन
बैतूल जिले में स्थित देश के पांचवें धाम के रूप में प्रसिद्ध श्री रुक्मणि बालाजी मंदिर बालाजीपुरम में आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। यहां करीब 20 वर्षों से चली आ रही सामूहिक करवा चौथ की परंपरा इस वर्ष भी भव्य रूप में मनाई गई। आयोजन में 500 से अधिक जोड़ों ने एक साथ पूजा-अर्चना कर पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की।
श्री रुक्मणि बालाजी मंदिर बालाजीपुरम में हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सामूहिक करवा चौथ का आयोजन किया जाता है। बालाजीपुरम समिति की ओर से छोटे स्तर पर शुरू की गई यह परंपरा आज देशभर में प्रसिद्ध हो चुकी है। आयोजन में शामिल होने के लिए बैतूल और मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में जोड़े पहुंचते हैं।
इस वर्ष भी मंदिर परिसर में सुबह से ही महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर हाथों में पूजा की थाली लेकर मंदिर पहुंचीं। यहां पंडितों ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सामूहिक रूप से करवा चौथ की कथा सुनाई। कथा के बाद महिलाओं ने एक साथ करवा माता की पूजा-अर्चना की और अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन तथा अखंड सौभाग्य की कामना की।
चंद्रोदय के बाद महिलाओं ने छलनी से चंद्रमा और अपने पति का दर्शन कर व्रत खोला। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय श्री बालाजी के जयकारों से गूंज उठा। एक साथ 500 से अधिक जोड़ों द्वारा पूजन किए जाने का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
बालाजीपुरम समिति की ओर से आयोजन के लिए हर साल विशेष तैयारियां की जाती हैं। समिति के सदस्यों ने बताया कि सभी जोड़ों के लिए पूजा सामग्री, बैठने की व्यवस्था, जलपान और प्रसाद की निःशुल्क व्यवस्था की जाती है। समिति का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को जीवंत बनाए रखना तथा पति-पत्नी के पवित्र बंधन को और मजबूत करना है। वर्ष 2003 से लगातार जारी यह सामूहिक करवा चौथ आयोजन आज देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

