मप्र हाई कोर्ट अनिका का जीवन बचाने के लिए सख्त, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब
इंदौर, 22 जून (हि.स.)। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए टाइप-2) जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रही इंदौर की 3 साल की मासूम अनिका के इलाज को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। उसे जीवनरक्षक इलाज के लिए करोड़ों रुपये की आवश्यकता और लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बीच अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान बच्ची के जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए दोनों सरकारों के वकीलों को मामले में विस्तृत लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। अदालत ने एडवोकेट जनरल को निर्देशित किया है कि वह बच्ची की गंभीर स्थिति और समय को देखते हुए मामले में एम्स से समन्वय कर रिप्लाय पेश करें। मामले की अगली सुनवाई अब 30 जून को होगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कुशल गोयल और केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता अनुज भार्गव उपस्थित रहे। हालांकि, जब राज्य सरकार की ओर से यह बताया गया कि अभी तक शासन से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं, तो उच्च न्यायालय ने इस पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पिछली सुनवाई में भी सरकारों से यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि मानवता के आधार पर बच्ची के इलाज में वे किस प्रकार सहायता कर सकती हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
मामले की गंभीरता के बावजूद लगातार दूसरी सुनवाई में भी एम्स की ओर से कोई प्रतिनिधि या वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इस पर भी न्यायालय ने अप्रत्यक्ष रूप से चिंता व्यक्त की। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन को निर्देश दिया गया है कि वे एम्स, नई दिल्ली से आवश्यक निर्देश प्राप्त कर मामले में संक्षिप्त जवाब प्रस्तुत करें। राज्य शासन के अधिवक्ता को निर्देशित किया गया कि वे यह स्पष्ट करें कि क्या राज्य सरकार किसी भी रूप में मासूम अनिका के इलाज में आर्थिक या अन्य सहायता प्रदान कर सकती है।
अनिका की ओर से एडवोकेट चंचल गुप्ता और लखन शर्मा ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि बच्ची की हालत लगातार गंभीर होती जा रही है और इलाज में देरी उसके लिए जोखिम बढ़ा रही है। उन्होंने उपचार की तात्कालिक आवश्यकता पर जोर देते हुए शीघ्र निर्णय की मांग की।
गौरतलब है कि इंदौर की 3 साल की मासूम अनिका शर्मा स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए टाइप-2) जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से पीड़ित है। इसके इलाज के लिए 9.5 करोड़ रुपये इंजेक्शन लगेगा, जो अमेरिका से आना है। पिछले कई महीनों से अनिका की मां सरिता और पिता प्रवीण ने कई लोगों के साथ मिलकर क्राउड फंडिंग की और इस क्राउड फंडिंग से अब तक 8 करोड़ 23 लाख रुपये इकट्ठा हो गए हैं। बच्ची के इलाज में सरकारी मदद के लिए उसके माता-पिता ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
परिजनों के अनुसार एसएमए टाइप-2 के इलाज का खर्चा करीब नौ करोड़ रुपये था, लेकिन डॉलर की बढ़ती कीमतों के कारण अब यह राशि बढ़कर लगभग 9.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। परिवार का कहना है कि इलाज को आगे बढ़ाने के लिए फिलहाल करीब दो करोड़ रुपये की तत्काल आवश्यकता है।
दुर्लभ बीमारी से जूझ रही अनिका के परिवार की निगाहें अब 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि उसके इलाज के लिए सरकारी मदद का रास्ता खुलेगा या नहीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

