home page

संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है ऐतिहासिक नगर चंदेरी : ज्योतिरादित्य सिंधिया

 | 
संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है ऐतिहासिक नगर चंदेरी : ज्योतिरादित्य सिंधिया


संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है ऐतिहासिक नगर चंदेरी : ज्योतिरादित्य सिंधिया


संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है ऐतिहासिक नगर चंदेरी : ज्योतिरादित्य सिंधिया


संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है ऐतिहासिक नगर चंदेरी : ज्योतिरादित्य सिंधिया


- केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने चंदेरी में बैजू बावरा संगीत समारोह का किया शुभारंभ

भोपाल, 15 मार्च (हि.स.)। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि ऐतिहासिक गौरवशाली नगरी चंदेरी सदियों से कला, संस्कृति और अद्भुत कारीगरी की पहचान रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विरासत भी, विकास भी के मंत्र के साथ यह ऐतिहासिक शहर संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है।

केन्द्रीय मंत्री सिंधिया रविवार शाम को मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी में आयोजित बैजू बावरा संगीत समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री सिंधिया और संस्कृति मंत्री लोधी ने चंदेरी मेला ग्राउंड में आयोजित बैजू बावरा संगीत समारोह का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि ऐतिहासिक गौरवशाली चंदेरी नगरी में महान संगीतज्ञ बैजू बावरा समारोह का आयोजन एक महत्वपूर्ण कड़ी है। ग्वालियर में महान संगीतज्ञ तानसेन तथा चंदेरी में बैजू बावरा संगीत समारोह का आयोजन वृहद स्तर पर हो, यह सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि चंदेरी में पग-पग और डग-डग पर प्राचीन ऐतिहासिक धराहरें हैं, जो प्राचीन काल का इतिहास बताती हैं। चंदेरी की इस माटी के साथ सिंधिया परिवार का सदैव हृदय से संबंध रहा है। मध्य प्रदेश के एक छोर पर बसी चंदेरी ने समूचे बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के अंचल को एक बट वृक्ष के रूप में छाया दी है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर में संगीत सम्राट तानसेन तथा चंदेरी में महान संगीतज्ञ बैजू बावरा समारोह के बीच प्रतिवर्ष प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, जिससे ग्वालियर के साथ-साथ आने वाले समय में चंदेरी का भी महत्व संगीत के क्षेत्र में विश्व में चिरस्थाई हो सके।

संस्कृति मंत्री लोधी ने कहा कि भारत की संस्कृति में संगीत को आत्मा में अभिव्यक्ति माना गया है। संगीत को नादमय माना गया है। संपूर्ण जगत नादमय में है सृष्टि का आधार नाद है और सभी इसी इसी नाद से प्रेरित होकर अपनी साधना की अभिव्यक्ति करते हैं। भारत की परंपरा में संगीत को ही ईश्वर से संवाद का माध्यम माना जाता है। जहां संगीत है, वहां नृत्य है, जहां नृत्य है, वहां ईश्वर है और जहां ईश्वर है, वहां मंगल ही मंगल होता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत साधना की इसी महान परंपरा ने स्वामी हरिदास, तानसेन, बैजू बावरा जैसे महान संगीतज्ञों को जन्म दिया है। बैजू बावरा महान संगीत परंपरा के तपस्वी थे, जो हमेंशा संगीत साधना से आत्मा की यात्रा तक ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा ऐसे आयोजन लगातार किए जा रहे हैं, जिससे संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है।

शुभारंभ अवसर पर उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर ने चंदेरी में तीन दिवसीय बैजू बावरा समारोह के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बैजू बावरा समारोह का आयोजन प्रति वर्ष चंदेरी में नियमित रूप से कराया जाएगा।

राज्य स्तरीय साहित्य कला क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने कलाकारों का किया सम्मान

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने मध्य प्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार साहित्य कला क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का सम्मान किया। इनमें दत्तात्रय दामोदर देवलालीकर पुरस्कार से- नंदिता तिवारी (कृति शीर्षक– स्क्रैप मटेरियल), रघुनाथ कृष्णराव फड़के पुरस्कार से -अनुश्री गुप्ता (कृति शीर्षक -सुंदरकांड एवं समकालीन कथा), नारायण श्रीधर बेन्द्रे पुरस्कार से- गोविंद विश्वकर्मा (कृति शीर्षक मृत्युंजय), मुकुन्द सखाराम भाण्ड पुरस्कार - प्रतिभा सिंह (कृति शीर्षक- संपूर्ण रामायण), देवकृष्ण जटाशंकर जोशी पुरस्कार - मोहन विश्वकर्मा (कृति शीर्षक- मैं और मेरी सहेली), जगदीश स्वामीनाथन पुरस्कार -आकाश जाटव (कृति शीर्षक ग्वालियरनेस 2), लक्ष्मीसिंह राजपूत पुरस्कार - शैलजा सुल्लेरे (कृति शीर्षक - हनुमान चालीसा), राममनोहर सिन्हा पुरस्कार -अनूप श्रीवास्तव (कृति शीर्षक– मांडू सीरीज) एवं विष्णु चिंचालकर पुरस्कार से आदित्य सिंह राजपूत बैलेंस वन (कृति शीर्षक- स्क्रैप मटेरियल) को अलंकृत किया गया। सम्मान स्वरूप सम्मान पट्टिका, 51 हजार रुपये की कर मुक्त राशि, शॉल एवं श्रीफल प्रदान किया गया।

समारोह के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों ने रूपंकर कला प्रदर्शनी का अवलोकन कर सराहना की। इस प्रदर्शनी में राज्य रूपंकर कला पुरस्कार हेतु आमंत्रित कलाकृतियों में से चयनित 80 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया, जिसमें चित्र एवं मूर्तिकला शामिल हैं। तत्पश्चात हुनर– प्रदर्शनी सह विक्रय में शिल्पकलाओं का अवलोकन किया गया, जिसमें शिल्पकारों द्वारा चंदेरी साड़ी, गौ शिल्प, माटी शिल्प, लकड़ी के खिलौने इत्यादि की सराहना की।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर